आधार पे आम लोगों की राय को नियोजित ढंग से बदलने का प्रयास कौन कर रहा? – Alt News

आधार पे आम लोगों की राय को नियोजित ढंग से बदलने का प्रयास कौन कर रहा?

आधार पे आम लोगों की राय को नियोजित ढंग से बदलने का प्रयास कौन कर रहा? – Alt News

सुप्रीम कोर्ट ने 17 जनवरी को आधार मामले की अंतिम सुनवाई शुरू कर दी। UID प्रोजेक्ट, जो शुरूआत से ही विवाद के केंद्र में र…

4 thoughts on “आधार पे आम लोगों की राय को नियोजित ढंग से बदलने का प्रयास कौन कर रहा? – Alt News”

  1. Mr Nilikini…through.Aadhar the Govt wants to make Robots out of human beings….Privacy is a human NEED….Technocrats cannot be depended upon ….

  2. विदेशी दल्ले नीलकणिया ।
    येCia का ऐजेट है ।
    चोर कही के भाग गया ।आधार पर देश के लोगो का मूर्ख बनाकर ।

  3. “खबर वही जिसे दबाने का प्रयास किया जाये, बाकि सब विज्ञापन है” -लार्ड नॉर्थक्लिफ

    जो ईमानदार हैं तथा कानून और नियमों का पालन करते हैं केवल वे ही आगे पढ़ें क्योंकि मुद्दा उन्ही से सम्बंधित है:

    उस पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया गया है जिसने आधार डेटा की हैकिंग करने वालों और उस डेटा को 500 रुपये में बेचने वाले लोगों का खुलासा किया था। स्वयं विचार कीजिये कि क्या महत्वपूर्ण था? जांच करके चोर को पकड़ना या चोर की पहचान बताने वाले को?

    अमेरिका में भी एडवर्ड स्नोडेन ने निजता की सुरक्षा से सम्बंधित मामला उठाया था और वहां की सरकार को निजता हनन मामले में बेनकाब किया था। उसके बाद अमेरिका में तो निजता में इतनी गहरी सेंधमारी पकड़ी गयी थी की सैमसंग कंपनी के टीवी तक लोगों के घरों में उनकी जानकारी के बिना उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग तक कर रहे थे। अमेरिका में लोगों की निजता में सेंधमारी का इतना बड़ा खुलासा करने वाले एडवर्ड स्नोडेन ने भी ट्वीट करके भारत में आधार को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। आज अमेरिकी सरकार एडवर्ड स्नोडेन के पीछे इतनी बुरी तरह से पड़ी है कि स्नोडेन दूसरे देश में शरणार्थी का जीवन गुजारने को मजबूर है। क्या हम भी हमारे देश में इस प्रकार की स्थिति पैदा होने देना चाहते हैं?

    यदि कहीं कोई दोष है तो उसमे सुधार की गुंजाईश तो तभी तक रहती जब कि उस दोष को स्वीकार किया जाये, यहाँ तो कोई स्वीकार करने को ही तैयार नहीं है तो सुधार की क्या उम्मीद की जाये? वैसे भी ये आधार योजना तो कांग्रेस लायी थी, तब इसका जोरशोर से विरोध करने वाली भाजपा आज इसको लागु करने के लिए इतनी बेताब क्यों है। https://goo.gl/VF7jnL

    भाजपा को इतने प्रचंड बहुमत से सत्ता में लाने का कारण उनके द्वारा विभिन्न मुद्दों पर सत्तारूढ़ कांग्रेस का विरोध करना था जिनमे से आधार, एफडीआई और जीएसटी का विरोध भी था। विपक्ष में रहते समय उन्होंने निजता की सुरक्षा पर पड़ने वाले खतरे के चलते आधार का विरोध किया किन्तु सत्ता में आते ही वे तो आधार को और भी अधिक विध्वंसात्मक तरीके से लागु करने में जुटे हैं।

    जब वो ही सब होना था तो फिर सत्ता परिवर्तन से क्या लाभ? योजनाएं तो सारी वे ही लागु हो रही हैं जो पूर्ववती सरकार के समय बनी थी किन्तु उस समय जन व विपक्षी दलों के विरोध चलते लागु नहीं हो पायीं। और जनता ने जिस लोकपाल के समर्थन में आंदोलन किया उसका लाभ लेकर कुछ लोग सत्ता में जा बैठे परन्तु वो जनलोकपाल आजतक नदारद है।

    इसका क्या अर्थ लगाया जाये? मेरी नजर में तो अब ये कुछ ऐसा है कि कांग्रेस ने बड़ी चालाकी से अपनी उन योजनाओं को भी भाजपा के हाथों से लागु करवा लिया है जो उनके कार्यकाल के दौरान व्यापक विरोध के चलते लागू नहीं हो पायीं। अब इन योजनाओं के लागू होने पर असंतोष फैलना तो स्वाभाविक था ही, अब इस असंतोष के चलते ठीकरा भाजपा के सिर पर फूटना तय है, जाहिर है कांग्रेस इन योजनाओं के दोष से साफ़ बच निकलेगी और सहानुभूति बटोरने में कामयाब होगी सो अलग, और लक्षण तो अब दिखने भी लगे हैं।

    अम्बानी जी ने तो बहुत पहले ही कह दिया था कि “डेटा ही भविष्य का तेल है”, अर्थात बहुमूल्य। अब अंदाजा लगाइये कितनी शक्तियां आपके निजी डेटा को हथियाने के पीछे पड़ी हैं। उन्होंने जो जिओ मुफ्त दिया था वो भी कोई मुफ्त नहीं था। नोटबंदी के दौरान जब सभी को ऑनलाइन ट्रांजेक्सन करने के लिए मोबाइल और इंटरनेट की आवश्यकता पड़ी तो अम्बानी जी ने मुफ्त जिओ नंबर देने के बदले आप की आधार जानकारियां भी जुटा ली थी, याद कीजिये नए फोन आधार पहचान-पत्र से ही दिए गए थे, अर्थात आधार जानकारी का बड़ा डेटाबेस नोटबंदी के दौरान तैयार हो गया। https://goo.gl/VF7jnL

    थोड़े समय पहले ही एयरटेल ने किस प्रकार से आधार के चलते लोगों की एलपीजी सब्सिडी अपने बैंक में जमा करवा ली थी और लोगों को पता भी नहीं चल पाया, ये भी सभी को ज्ञात होगा। आपके एक बैंक खाते में आने वाले रुपयों को आपके दूसरे बैंक के खाते में आपकी जानकारी के बिना ट्रांसफर किया जा सकता है तो सोचिये और क्या नहीं किया जा सकता? आपके आधार नंबर से नया फोन नंबर लिया जा सकता है और उस नंबर से आपके बैंक खाते और निवेश खाते को जोड़ा जा सकता है। खाते को ऑपरेट करने के लिए ओटीपी उस नए फोन नंबर पर प्राप्त किया जा सकता है और एक झटके में आपका बैंक खाता और निवेश….? क्या-क्या हो सकता है ये आप खुद सोच सकते हैं।

    जब ये आधार डेटा में सेंधमारी वाली रिपोर्ट आयी थी तो पहले सरकार ने उस रिपोर्ट को जाली ठहरने के लिए ये तर्क दिया कि आधार से छद्म शिक्षकों के आंकड़े उजागर करने में मदद मिली इसलिए आधार भ्रष्टाचार मिटाने के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार है। और अब तो उस पत्रकार के खिलाफ मुकदमा ही दायर कर डाला। जिनको इस जाली अध्यापक वाले तर्क में दम नजर आता है वो जरा बताएं कि आप निजी जीवन में कौनसे भ्रष्टाचार का सबसे अधिक सामना करते हैं? सरकारी बाबुओं, म्युनिसिपल्टी कर्मियों, नेताओं या पुलिस वालों के भ्रष्टाचार का । क्या आज तक एक भी ऐसा भ्रष्टाचारी पकड़ा गया आधार से? क्या आज तक एक भी फूटी सड़क के जिम्मेदार लोगों का खुलासा हो पाया आधार से? https://goo.gl/VF7jnL

    वैसे भी केवल ईमानदार लोग जो नियमों का पालन करते हैं वे ही आधार से अपना सारा डेटा जोड़ेंगे। बेईमानो के लिए कई रास्ते उपलब्ध होते हैं। पहले जो लोग नकदी में दो नंबर का काम करते थे वो उनके लिए अब बिटकॉइन जैसी मुद्राएं उपलध हैं जिनके लेनदेन को कोइ नहीं पकड़ सकता। बेईमान तो हमेशा पतली गलियां निकाल कर बेईमानी करते आये हैं, वे तो अब भी कर रहे हैं। जैसे कि ये आधार डेटा की हैकिंग करने वाले या आधार डेटा को चंद पैसों के लिए बेचने वाले। ऐसे में स्वयं विचार कीजिये कि क्या महत्वपूर्ण था? चोर को पकड़ना या चोर की पहचान बताने वाले को? चिंता वे ही करें जो नियमों का ईमानदारी से पालन करते हैं।

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