वो चाय नहीं बेचता था,उसने स्थानीय स्कूल के चौकीदार के रूप में अपना करिअर शुरू क…

वो चाय नहीं बेचता था,उसने स्थानीय स्कूल के चौकीदार के रूप में अपना करिअर शुरू किया था जहां उन्हें रोज तिरंगा फहराने और उसे उतारने के लिए 212 रुपये मिलते थे। फिर एक दिन वो हमारे अरुणाचल प्रदेश का सीएम बन गया। दिल्ली आता था तो बड़े नेता उससे बात नहीं करते थे,प्रदेश में चारों ओर गिद्ध और चील। फिर एक दिन जब वो सीएम नहीं था उसने अवसाद में आत्महत्या कर ली। 60 पन्ने का सुसाइड नोट छोड़ कर गया “कालिखो पुल”। कालिखो चार महीने तक सीएम रहे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की वजह से उन्हें अपने पद से हटना पड़ा। सुसाइड नोट में जानते हैं कालिखो ने क्या लिखा?यह लिखा ” आदित्य मिश्रा, कोर्ट में मेरे पक्ष में फैसले के लिए 37 करोड़ रूपए मांग रहे थे।” खबर यह है कि यह आदित्य मिश्रा सीजेआई दीपक मिश्रा का भाई था।

-©Awesh Tiwari

6 thoughts on “वो चाय नहीं बेचता था,उसने स्थानीय स्कूल के चौकीदार के रूप में अपना करिअर शुरू क…”

  1. सत्यवादी सदेव शहीद होते आए हैं ,हजरत इसा मसीह , वेगयानिक galilio ,गांधी जी , मार्तिन लूथर किंग ,गत कुछ वर्षो मे तमाम पत्रकार , क्या आप भी शहीद हो गये , T . V पर कई दिन से दिखाई नहीं दे रहे ,मुबारक हो ,आप paarty हाजिर हैं , केजरीवाल sir ji को भी खुद शहीद होने की सलाह दे रहा हूँ , वरना वे भी शहीद कर दिये जायेंगे . देश मे बहुत लोग शहीदी भावना मे है , शहीदो की एक क्रांतिकारी पार्टी बन जायेगी ………

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