जीएसटी की माया: कंपनी छह लाख और टैक्स मात्र 250 करोड़ ! फाइनेंशियल एक्सप्रे…

जीएसटी की माया: कंपनी छह लाख और टैक्स मात्र 250 करोड़ !

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के सुमित झा ने लिखा है कि जुलाई से सितंबर के बीच कंपोज़िशन स्कीम के तहत रजिस्टर्ड कंपनियों का टैक्स रिटर्न बताता है कि छोटी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कर चोरी की है।

कंपोज़िशन स्कीम क्या है, इसे ठीक से समझना होगा। अखबार लिखता है कि छोटी कंपनियों के लिए रिटर्न भरना आसान हो इसलिए यह व्यवस्था बनाई गई है। उनकी प्रक्रिया भी सरल है और तीन महीने में एक बार भरना होता है।

आज की तारीख़ में कंपोज़िशन स्कीम के तहत दर्ज छोटी कंपनियों की संख्या करीब 15 लाख है। जबकि सितंबर में इनकी संख्या 10 से 11 लाख थी। इनमें से भी मात्र 6 लाख कंपनियों ने ही जुलाई से सितंबर का जीएसटी रिटर्न भरा है।

क्या आप जानते हैं कि 6 लाख छोटी कंपनियों से कितना टैक्स आया है? मात्र 250 करोड़। सुमित झा ने इन कंपनियों के चेन से जुड़े और कंपनियों के टर्नओवर से एक अनुमान निकाला है। इसका मतलब यह हुआ कि इन कंपनियों का औसत टर्नओवर 2 लाख है। अगर आप पूरे साल का इनका डेटा देखें तो मात्र 8 लाख है।

समस्या यह है कि जिन कंपनियों का या फर्म का सालाना 20 लाख से कम का टर्नओवर हो उन्हें जीएसटी रिटर्न भरने की ज़रूरत भी नहीं है। इसका मतलब है कि छोटी कंपनियां अपना टर्नओवर कम बता रही हैं।

आप जानते ही हैं कि दस लाख कंपनियों का आडिट करने में ज़माना गुज़र जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि बड़े पैमाने पर कर चोरी की छूट दी जा रही है। बस हो यह रहा है कि कोई आंख बंद कर ले रहा है क्योंकि उसका काम स्लोगन से तो चल ही जा रहा है।

आखिर जीएसटी के आने से कर चोरी कहां बंद हुई है? क्या 20 लाख से कम के टर्नओवर पर रिटर्न नहीं भरने की छूट इसलिए दी गई ताकि कंपनियां इसका लाभ उठाकर चोरी कर सकें और उधर नेता जनता के बीच ढोल पीटते रहें कि हमने जीएसटी लाकर चोरी रोक दी है।

क्या आपने किसी हिन्दी अखबार में ऐसी ख़बर पढ़ी? नहीं क्योंकि आपका हिन्दी अख़बार आपको मूर्ख बना रहा है। वह सरकारों का पांव पोछना बन चुका है। आप सतर्क रहें। बहुत जोखिम उठाकर यह बात कह रहा हूं।

सुमित झा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जीएसटी फाइल करने को आसान बनाने के नाम पर राजनेता से लेकर जानकार तक यह सुझाव दे रहे हैं कि कंपोज़िशन स्कीम के तहत कंपोज़िशन स्कीम के तहत डेढ़ करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनियों को भी शामिल किया जाए।
यह ज़रूर कुछ ऐसा खेल है जिसे हम आम पाठक नहीं समझते हैं मगर ध्यान से देखेंगे तो इस खेल को समझना इतना भी मुश्किल नहीं है।

सुमित के अनुसार डेटा के विश्लेषण से साफ होता है कि कंपोज़िशन स्कीम के तहत 20 लाख टर्नओवर की सीमा को बढ़ा कर डेढ़ करोड़ करने की कोई ज़रूरत नहीं है बल्कि टैक्स चोरी रोकने के लिए ज़रूरी है कि 20 लाख से भी कम कर दिया जाए।

बिजनेस स्टैंडर्ड में श्रीमि चौधरी की रिपोर्ट पर ग़ौर कीजिए। CBDT ( central board of direct taxex) को दिसंबर की तिमाही का अग्रिम कर वसूली का के आंकड़ो को जुटाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। दिसंबर 15 तक करदाताओं को अग्रिम कर देना होता है। सूत्रों के हवाले से श्रीमि ने लिखा है कि चोटी की 100 कंपनियों ने जो अग्रिम कर जमा किया है और जो टैक्स विभाग ने अनुमान लगाया था, उसमें काफी अंतर है। मिलान करने में देरी के कारण अभी तक यह आंकड़ा सामने नहीं आया है।

राम जाने यह भी कोई बहाना न हो। इस वक्त नवंबर की जीएसटी वसूली काफी घटी है। वित्तीय घाटा बढ़ गया है। सरकार ने 50,000 करोड़ का कर्ज़ लिया है। ऐसे में अग्रिम कर वसूली का आंकड़ा भी कम आएगा तो विज्ञापनबाज़ी का मज़ा ख़राब हो जाएगा।

बिजनेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए कर अधिकारियों ने कहा है कि हर तिमाही में हमारे आंकलन और वास्तविक अग्रिम कर जमा में 5 से 7 फीसदी का अंतर आ ही जाता है मगर इस बार यह अंतर 15 और 20 फीसदी तक दिख रहा है। इसका कारण क्या है और इस ख़बर का मतलब क्या निकलता है, इसकी बात ख़बर में नहीं थी। कई बार ख़बरें इसी तरह हमें अधर में छोड़ देताी हैं।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने 60 शहरों के लिए 9,860 करोड़ रुपये जारी किए थे। इसका मात्र 7 प्रतिशत ख़र्च हुआ है। करीब 645 करोड़ ही। रांची ने तो मात्र 35 लाख ही ख़र्च किए हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री अखबारों में तो ऐसे विज्ञापन दे रहे हैं जैसे हकीकत किसी को मालूम ही न हो।

स्मार्ट सिटी के तहत 90 शहरों का चयन किया गया है। हर शहर को स्मार्ट होने के लिए 500 करोड़ दिए गए हैं। आप थोड़ा सा दिमाग़ लगाएंगे तो समझ सकते हैं कि इस पैसे से क्या हो सकता है। फर्ज़ी दिखावे के लिए दो चार काम हो जाएंगे, कहीं दस पांच डस्टबिन और फ्री वाई फाई लगा दिया जाएगा बस हो गया स्मार्ट सिटी। इसके नाम पर शहरों में रैलियां निकलती हैं, लोग रोते हैं कि हमारे शहर का नाम स्मार्ट सिटी में नहीं आया, नाम आ जाता है, मिठाई बंट जाती है और काम उसी रफ्तार से जिस रफ्तार से होता रहा है।

स्मार्ट सिटी के एलान वाली ख़बर तो पहले पन्ने पर छपती है क्योंकि इससे आपको सपना दिखाया जाता है। सात प्रतिशत ख़र्च का मतलब है कि स्मार्ट सिटी फेल है। इसकी ख़बर पहले पन्ने पर क्यों नहीं छपती है, आखिरी पन्ने पर क्यों छपती है। आप अपने अपने अखबारों में चेक कीजिए कि स्मार्ट सिटी वाली ये ख़बर किस पन्ने पर छपी है। पीटीआई की है तो सबको मिली ही होगी।

बाकी सारा काम नारों में हो रहा है। आई टी सेल की धमकियों से हो रहा है और झूठ तंत्र के सहारे हो रहा है। जय हिन्द। यही सबकी बात है। यही मन की बात है।

नोट: अख़बार ख़रीदना अख़बार पढ़ना नहीं होता है। पढ़ने के लिए अख़बार में ख़बर खोजनी पड़ती है। किसी भी सरकार का मूल्यांकन सबसे पहले इस बात से कीजिए कि उसके राज में मीडिया कितना स्वतंत्र था। सूचना ही सही नहीं है तो आपकी समझ कैसे सही हो सकती है।

25 thoughts on “जीएसटी की माया: कंपनी छह लाख और टैक्स मात्र 250 करोड़ ! फाइनेंशियल एक्सप्रे…”

  1. gst ने कुछ अच्छा किया है? दोनों पहलू पे बात होनी चाहिए…. एक ही पहलू पे हमेशा बात करना भी गोदी मीडिया का प्रकार है सर😊

  2. मोदी भक्त पोस्ट भी नही पढते और बिधवा विलाप शुरू कर देते है😂

    आते ही होंगे आदरणीय मोदी जी के पालतू 🐶 गाली देने 😁😂

  3. सरकार द्वारा अपनाई गई नीतियां scholor के समझ के बाहर होती है लेकिन वो(सरकार) मान कर चलती है कि आम आदमी oxford university से पढ़ के आये हैं असलियत में भले आम मानस ने मनोहर पोथी भी ना पढ़ी हो।

  4. दूसरों का पति छीनने वाली हेमा मालनी और
    स्मृती ईरानी भी तीन तलाक पर प्रवचन दे रही है 😂😅😂😁

    घोर कलियुग

  5. जब तक मंत्री, संतरी का हिस्सा उनको मिलता रहेगा, कोई भी स्किम सफल नही होगी, राजनैतिक चंदे पर कोई लगाम नही है ऐसे में जनता से ईमानदारी की उम्मीद बेकार है,, सरकार स्कीम तो एक से एक लेकर आ रही है पर उनका क्रियान्वयन नही है, महान बनने की जल्दबाजी है, होगी भी झूठे सपने जो दिखाए है, अच्छे दिनों के चक्कर मे चौबे जी दुबे जी बन बैठे है…

  6. Ye aakde sach main bahut chaukaane wale hain.. Hum wo padh rahe hain jo ho hi nahi raha.. aur jo ho raha hai wo dikhaya hi nahi ja raha akhbaar main.. tv pe bhi saas bahu aur sajis dikhane ke liye itna time kahan se laate hain ye news wale! news ka channel hai news dikhao.. paise kamane ka dhandha bana liya ab inhone aur sarkaar ke prem main itna lipt ho gayi hai ki unke jhoot ko expose hi nhi karna chahti hai! Sach to yahi hai ki Notebandi main ameeron aur netaon ka kala dhan safed ho gaya aur 1 rs bhi extra kala dhan nahi pakda gaya aur gst se Chhode vyapari ko maar diya! baaki aapke duwara Jha ji ke aakde bata rahe hain! Thanks Ravish Sir Ji for Making us know about the real fact!

  7. ravish ji आपका सोचना गलत है यँहा पे …क्यू की भरत मे ऐसे बहुत से छोटे व्यपारी हैँ जो govt को छोटी मोटी चीजे सूप्लाइ करते हैँ या फिर छोटी मोटी डीलरशिप लेकर व्यापार करते हैँ ….जिनको gst no. लेना जरूरी हो जाता है …जो छोटा मोटा गूड्स घर मे बनाते हैँ वो व gst no. लेते हैँ …
    जिनका tex नही बनता फिर भी जरूरत के हिसाब से लेते हैँ …
    जमीन से जुड़िये और हकीकत को देखिये तब जा के लम्बी लम्बी पोस्ट करिये 😊

  8. क्या तब आप समर्थन करते अगर सुमित झा के कहे अनुसार सरकार जीएसटी लागू करती….? क्या तब उन छोटे व्यापारियों को कोई तकलीफ नहीं होती या तब आप उन बेचारे छोटे व्यापारियों की आवाज़ बुलंद नहीं करते….? जीएसटी के वक़्त आप ने ख़ुद सूरत के व्यापारियों की बात को नहीं उठाया था….? क्या दुनिया का कोई ऐसा देश हे जिसने ऐसा टैक्स सिस्टम बना लिया हे जहाँ कोई भी स्वइच्छा से टैक्स देना चाहता हे…?
    एक बार फिर दण्डवत प्रणाम आपको….
    Durgesh Pareek

  9. मेहनत तो आप बहुत करते हैं रविश बाबू, लिखते और भी शानदार और सरलता से हैं।
    दिक्कत सिर्फ इतनी है कि सिर्फ दिक्कत वाले पक्ष को ही देखते हैं, पहले की आपकी पत्रकारिता में आपको दाल में काला दिखता था, अब तो आपको दाल सिर्फ काली ही दिखती है।
    असल बात यह है कि आपने एक पत्रकार के रूप में अपनी विश्वसनीयता खो दी है, आपने इससे पहले बैंको द्वारा जमाकर्ताओं का पैसा जब्त कर लेने वाली एक खबर दिखाई, जिसको आपके प्रिय भक्तों ने सहज ही स्वीकार कर लिया था, क्योंकि ये ज्ञान उनके भगवान की वाल से उन्हें मिला था।लेकिन बाद में सरकार को स्वयं आगे आकर इस बात का खंडन करना पड़ा, पर आपके अंदर के अहंकारी हो चुके पत्रकार ने क्षमा मांगने के विषय पे वैसे ही नहीं सोचा जैसे कोई ट्रैन स्टेशन पर वापस आने की नहीं सोचती।

    पीछे ऐसा बहुत से रायता आपने फैलाया है जिससे अब आपकी किसी भी बात का यकीन करना खुद को मूर्ख बनाने जैसा है।

    हर सिक्के के दो पहलू होते है, पर आपको हमेशा (हम तो सवाल करेंगे) के नाम पर काला ही देखना और दिखाना होता है।

  10. वर्ष 2017 कई मायनों में खास रहा..

    नोटबन्दी का फैसला यद्दपि 2016 में आया था परंतु, इसका पूरा असर 2017 में रहा। आजाद भारत के इस दूसरे सबसे बड़े भूल का खामियाजा ये रहा कि अपेक्षित 5.5 लाख करोड़ का वित्तीय घाटा चालू वित्तीय वर्ष में 3 महीने शेष रहते ही हो गया है। आने वाले 3 महीनों में देश के लोगों में और कितना बोझ बढ़ने वाला है यह मेरे समझ से परे है। काबिल वित्त मंत्री भी मान चुके कि इस साल वित्तीय घाटे में बढोत्तरी हुई है। बहरहाल, देश मे अडाणी व अंबानी की बढ़ती संपत्ति ने विश्व में तेजी से होने वाली ग्रोथ वाली कंपनियों में शामिल होकर देश का नाम रोशन किया है।

    हड़बड़ी में लिया गया GST के फैसले का आलम ये है कि देश मे करोड़ों की संख्या में मौजूद छोटे व मंझोले व्यापारी पूर्व की भांति टैक्स चोरी करने का अवसर दिया जा रहा है या वे ऐसा करने के लिए विवस हैं। व्यापारी आज भी हैरान-परेशान हैं।

    तीन तलाक यानि एक साथ तालाक-तालाक-तालाक जिसे अगस्त महीने में ही सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया जो कि क़ुरान-ए-शरीफ में भी जायज नहीं है, एक बार फिर हड़बड़ी में सरकार उसे Criminal offense का रूप देने पर तुली है। यहां बता दूं कि मैं भी तीन तालाक से इत्तेफ़ाक नहीं रखता हूं लेकिन, सरकार ने जिस प्रारूप को लोकसभा में प्रस्तुत किया है उसपर एतराज है। प्रारूप के मुताबिक 3 तालाक देने वाले पुरुष को 3 साल के लिए सजा होगी। उसके विरुद्ध गैर जमानती मामला चलेगा। साथ ही प्रारूप में कहा गया है कि 3 तालाक शुदा औरत (और नाबालिग बच्चों) को गुजरा भत्ता देना होगा। इस नियम के तहत क्या वाकई में ख़्वातीनों को भत्ता मिल पाएगा, ये बड़ा सवाल है।
    सरकार से आग्रह है कि तालाक शुदा महिलाओं से भी दुगुनी उन महिलाओं के बारे में भी कुछ कानून बनाए जो परित्यक्त हैं यानि वे महिलाएं तलाकशुदा नहीं हैं बल्कि अपने पति द्वारा छोड़ दी गई हैं। देश में ऐसी महिलाओं की संख्या 23 लाख से भी ज्यादा है जिनमें 20 लाख महिलाएं केवल हिन्दू हैं।

    2017 रेल दुर्घटनाओं, सैनिकों के शहादत पर आतंकियों को मारने और लिंचिस्तान के लिए भी याद रखा जाएगा। लोग सरेआम हत्या कर उसका वीडियो बना रहे हैं। भीड़ कानून अपना काम कर रही है। बहरहाल, 2018 में भी राष्ट्रवाद के नाम पर हिन्दू-मुश्लिम खेलिए और चुनाव जीतिए। बहुराष्ट्रीय प्रधानसेवक को 2018 में होने वाले वर्ल्ड टूर के लिए शुभकामनाएं…
    Happy 2018

  11. जीएसटी लागू हुए अब 6 महीने बीत चुके है जीएसटी से देश की अर्थव्यवस्था को अब तक क्या नुकसान पुहंच रहा है इस पर एक सीरीज लिखने की सोच रहा था यह पहली कड़ी है आप बोल सकते हैं कि लेखक हमेशा नकारात्मक रुख ही अख्तियार करता है पर मैं यह इसलिए लिख रहा हूँ कि शुरुआत से ही मैंने इस आधी अधूरी ओर बिना प्रॉपर तैयारी की इस जीएसटी व्यवस्था का विरोध किया है जो असहमत है फायदे कमेंट बॉक्स में बताने को स्वतंत्र है चाहे तो वह ऐसी ही लम्बी सीरीज जीएसटी के फायदे के बताने के लिए लिख सकते है

    पहले उस सपने की बात कर लेते हैं जो जीएसटी लागू करते वक्त सरकार ने आम आदमी को दिखाया था जैसे महंगाई कम हो जाएगी ? क्या छह महीने बाद अब भी आप यकीन करेंगे कि सरकार जीएसटी से चीजो को सस्ता रखने में कामयाब हो पाई है ?

    शुरुआत में ही जीएसटी में कई सामानों और सेवाओं के स्लैब बदलने के कारण चीजें महंगी हो गई। इसमें लग्जरी प्रोडक्ट के साथ साथ रोजमर्रा के काम मे आने वाली चीजें भी थी महंगाई दर नवम्बर में 15 महीनों के उच्चतम स्तर पर पुहंच गयी थी ओर यह सरकारी आंकड़े ही है आरबीआई स्वयं इस बात को लेकर चिंतित है कि आने वाले दिनों में रिटेल मंहगाई दर ओर ऊपर जाएगी

    दावा किया जा रहा था कि जीएसटी लागू होने के बाद उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी, मगर यह आकलन गलत ही साबित हुआ है खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में अप्रैल के बाद काफी बढ़ोतरी हुई है सरकार ने मूर्खता पूर्ण ढंग से वस्तुओ का वर्गीकरण कर अपनी मुश्किलें ओर बढ़ा ली हर चीज पर जीएसटी लागू होने से किसानों को फसलों के उत्पादन पर पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है यही बात मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए भी लागू हो रही है इनपुट कास्‍ट यानी लागत लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह से मैन्‍यूफैक्‍चरिंग कंपनियों के उत्‍पादों की लागत बढ़ी है नतीजा साफ आपके सामने है रियल इस्टेट के क्षेत्र में रफ्तार धीमी होने की वजह से इससे जुड़ी सामग्री का उत्पादन रेंगता हुआ हो पा रहा है, देश के बड़े व्यापार संगठनों का कहना है कि सरकार की नीतियों के कारण कारोबार में मंदी का दौर होने से लोगों को महंगाई से दो-चार होना पड़ रहा हैं
    जब जीएसटी लागू होने वाली थी तब भी लिखा था कि जो लोग सोचते हैं कि जीएसटी से महंगाई कम हो जाएगी वह लोग मूर्खो के स्वर्ग में है

  12. जीएसटी ने देश के कर ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन कर दिए है वित्त वर्ष 2017-18 के प्रथम आठ महीनों में ही राजकोषीय घाटा देश के सालाना बजटीय लक्ष्य का 112 फीसदी हो चुका हैं और जीएसटी से प्राप्त संग्रहण राशि लगातार कम हो रही है लेकिन सब केंद्र के घाटे की बाते कर रहे है राज्यों के घाटे के बारे मे कोई सोच नही रहा है यह पोस्ट इसी के बारे मे हैं

    जीएसटी के बारे कई मिथ थे जो पूरी तरह से टूट गए है जब इसे लागू किया गया तब यह कहा गया था कि उत्पाद निर्माता राज्यो से उपभोक्ता राज्यों को यानी जिन राज्यों में सामान का उपभोग किया जाता है उन्हें जीएसटी से ज्यादा फायदा मिलेगा क्योंकि यह अंतिम चरण पर आधारित कर हैं लेकिन आज इन छह महीनों की हकीकत यह है कि उपभोक्ता राज्यों ने विनिर्माता राज्यों के मुकाबले ज्यादा राजस्व घाटा दर्ज किया है

    वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से अक्टूबर में दिल्ली को छोड़कर सभी राज्यों ने राजस्व घाटा दर्ज किया
    ओर यह कोई छोटा मोटा घाटा नही है करीब 17 राज्यों ने 25 फीसदी से 59 फीसदी राजस्व घाटा दर्ज किया है। पुद्दुचेरी, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ ने क्रमश: अनुमान के मुकाबले 59 फीसदी, 50 फीसदी और 46 फीसदी कम राजस्व पाया है। वहीं उत्तर प्रदेश और हरियाणा ने क्रमश: 17 फीसदी और 16 फीसदी कम राजस्व हासिल किया हैं आखिर इस राजस्व घाटे की भरपाई कौन करेगा सीधी बात यह है कि इस घाटे की पूर्ति करना जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक के अधीन केंद्र सरकार का दायित्व है

    लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि क्या यह जिम्मेदारी केंद्र निभा रहा है हकीकत यह है कि देशभर में जीएसटी लागू होने के बाद राजस्व भरपाई के लिए राज्य सरकार को केंद्र से मिलने वाली मदद कम हो गई हैं हम यदि मध्यप्रदेश की ही बात करे
    तो आप पायंगे की जीएसटी से पहले जो कर राज्य शासन वसूलता था अब वह जीएसटी जैसी एकीकृत टेक्स व्यवस्था के कारण अब नही वसूल पा रहा है
    हालांकि इसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के लिए प्रतिमाह 1660 करोड़ रुपए सुरक्षित राजस्व देने का वादा किया था लेकिन अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2017 में 941 करोड़, 949 करोड़ व 1234 करोड़ रुपए प्राप्ति हुई जो कि सुरक्षित राजस्व से माहवार 43, 43 और 26 प्रतिशत कम है। भविष्य में महीनों में भी प्राप्त राजस्व, सुरक्षित राजस्व से कम रहने का अनुमान है
    यदि यह स्थिति मध्यप्रदेश के साथ है तो आप समझ सकते है कि बाकी राज्यों के लगभग यही हालात होंगें जब केंद्र के पास पैसा आएगा ही नही तो वह राज्यों को क्षतिपूर्ति कैसे करेगा ? यह एक तरह से विस्पोटक स्थिति पैदा हो गयी है हम बारूद के ढेर पर बैठे हुए है

  13. हिंदी अखवार पोंछना है, और आपको इंग्लिश आती नहीँ ये भी आप ही कहते हैं । फिर बिजनेस स्टैण्डर्ड पढ़ के इतना घुमाओ विश्लेषण कैसे कर ले रहे है

    अजीब दास्तां है। कुछ पत्रकार बिकने से अब आप पूरी हिंदी पत्रकारिता की बजा दिए। इतना अहंकार, ये वामपंथी ही कर सकते जो पेनमाफ़िया है।जनसत्ता के कुमार केतकर भी पोंछना हुए जो कांग्रेस भक्त हैं।

  14. सर गांव में एवं छोटे छोटे नगर पंचायती में GSP के नाम पर लूट हो रही है। 5 दिन पहले की बात है हमने 3दी मॉल से एक जूता लिया 450 कि और फिर बोला कि इसपर 4%GST लगेंगे मैंने बोला थी है दे दो..जब हमें बिल दिया तो हमने पाया कि यहाँ बिल में 0%GST लिख रहा है और हमसे 4% अलग से टोटल बिल में जोड़ दिया है जब हम विरोध किये तो बिल लेके फाड् दिया गया और दूरी बिल 540 वाली दे दिया। और ना जाने कितने लोगों GST के जरिये ठगी जा रही है उसका मुझे भी अंदाजा नही।
    चोर तो बहुत तरह नए नए ढंग से नए नए चालबाजी से चोरी कर रहे है। बिल कुछ और समान कुछ और ना ट्रांसपोर्ट में चेक हो रही ना ही कस्टम वाले चेक कर रहे है।

  15. सूरत जीत से पहले।।
    वामपंथी– gst के कड़कपन से व्यापारी त्राहि त्राहि कर रहा । मृत्यु शैया पे है। छेन्नु लोग कैमरा ले घर घर घूम घूम करुण रुन्दन किये।

    सूरत जीत के बाद—

    वामपन्थी—GST में 20 लाख से नीचे रिटर्न न भरवा कर सरकार व्यापारियों को कर चोरी का खूब मौके दे रही है। यानी बनिये मजे में हैं।

    हद है।
    ये चाहते हैं कि इतनी परेशानी के बाद भी व्यापारी बीजेपी से दूर नही हुआ तो 20 लाख से नीचे वाले को भी घुसेड़ दो ताकि छोटे कम tech वाले व्यापारी gst सर्वर के झमेले में फंस परेशान हो और सिस्टम जो सुधर रहा वो बिगड़ जाए।

    फिर gst को गब्बर बता फेल घोषित ये लोग कर दे और व्यापारी वास्तव में नाराज हो जाय।

    ये छेन्नु लोग छद्मवेशी होते है इनका निहितार्थ हमेशा भारत विरोधी चीज ही होती है बस मीठी चासनी लगा ये प्रस्तुत करते हैं।

  16. अजीब बात है जब विपक्ष में थे तब aadhar और GST का जमकर विरोध करते थे और जब सत्ता पाया तब मानो उन्ही में प्राण बसे हों…either the people were misguided earlier or are being fooled now..may be wisdom came late…ये सरकार धुआंधार काम कर रही है ये अलग बात है धुंआ ज्यादा है और धार कम!

  17. आप चित भी मेरा, पट भी मेरा और अँटा मेरे बाप का ऐसी रिपोर्टिंग ही क्यों करते हैं, रिपोर्ट का रेफ़्रेन्स देने के साथ साथ थोड़ी मेहनत ख़ुद भी कर लेते तो असलियत के लिए यों अंदाज़े नहीं लगाने पड़ते । कल तक आप ही झंडा उठाकर छोटी कम्पनी के लिए चीख़ रहे थे कि रिटर्न भरने में तकलीफ़ होती है, छूट मिलनी चाहिए, अभी छूट मिल गयी है तो टैक्स कलेक्शन तो कम होगा ही। और आप इतनी जल्दी इस नतीजे पर पहुँच गए कि अगर इनका औसत टर्नओवर ८ लाख आ रहा है तो ये अपना टर्नओवर कम करके बता रही हैं, कौनसा लॉजिक है …..?
    छोटी कम्पनी की संख्या इसलिए बढ़ी है क्योंकि जब तक आपका टर्नओवर २० लाख पार नहीं करता तब तक आपको रिटर्न की ज़रूरत नहीं है और बाज़ार का हाल तो आप अपने लेखों में बता ही चुके हैं, सिर्फ़ व्यापारी ही बचे हैं, छोटे उत्पादक तो बाज़ार से बाहर हो चुके हैं, उत्पादन पर अब सिर्फ़ बड़ी कम्पनी का अधिकार होगा, ऐसे में रिटर्न भी कम भरे जाएँगे और टर्नओवर तो कम रहेगा ही ।
    आपके या आपके सुमित झा के हिसाब से टैक्स चोरी रोकनेके लिए टर्न ओवर २० लाख से कम कर दिया जाए, इसका मतलब समझते हैं आप ? २० लाख के टर्न ओवर पर अगर ५% लाभ केहिसाब से साल के १लाख ₹कमाने वाले व्यापारी के पूरे परिवार के लिए महीने भर की कमाई ८३०० ₹ के लगभग पड़ती है, शायद मनेरेगा वाला मज़दूर इस से ज़्यादा कमाता है,इतना कमाने वाला अब ये ८३०० ₹ सीए को दे ( ये मत कहना कि रिटर्न भरना बहुत आसान है ), या सरकार को दे ( क्योंकि सरकार को टैक्स पहले चाहिए)। और हाँ इसमें अभी उत्पादक की तो बात ही नहीं की जो अपना पैसा लगा कर उत्पादन करता है पर बाज़ार में उसका माल और पैसा दोनों फँसा रहता है और टर्नओवर तो साल के अंत मेंमाल बिकने केबाद ही पता चल पाता है, पर सरकार को टैक्स तो माल फ़ैक्टरी से बाहर निकालने पर ही देना पड़ेगा (e way bill ), और हाँ व्यापारी कर चोरी कर रहे हैं, वाह छेनू भाई!

  18. अब तो आपकी बेसिर-पैर की पोस्ट्स पर हँसी भी नहीं आती, बल्कि आपके पतन पर दया आती है। GST के बारे में आपका प्रवचन वैसा ही है जैसे आमलेट देख कर कोई अण्डा-उत्पादन की प्रक्रिया पर प्रश्न करे। ख़ैर! Get well soon!!

  19. रविषजी, नेट के जरिये बैंकिंग, रेलवे रिज़र्वेशन आदि होने से भी काफी आसानी हुई है तो कुछ फ्रॉड भी हुए है, देश मे highways का जाल बिछने से काफी सुगमता हुई है तो कुछ दुर्घटनाएं भी होती है
    इसी प्रकार GST लागू होने से सिस्टम में पारदर्शिता आएगी तो कुछ कर अपवंचक इसका लाभ भी उठाएंगे।

    क्या आप चाहते है देश बैलगाड़ी युग मे ही रह जाये ???

  20. Sir GST is a new lesson. A lots of changes is happening and will in happen in 1-2 years. Earlier this much data analysis was not possible due to so many taxes but now these analysis are possible and as per requirement, changes will have to be done. You should continue showing this type of analysis. India is a big country and Perfect GST is not possible in short time. it will surely take 1-2 years.

  21. I don’t know what wrong nd right. My some friends write about language of media. I think u all r very good in writing nd reading but unfortunately u have lack of knowledge, or maturity. Some1 wants to aware or share knowledge with us but due to biased or lack of understanding/intelligency we are not able to understand. Try to understand or face reality. झूठ की नीव पर कभी इम्मरात खड़ी नहीं होतीं, यही चिरंजीवी सत्य है, इससे मानना पड़ेगा. ! Gud luck.👍 forget old 2017 and start a new day with 2108.

Comments are closed.