मिलिए भारत के पहले हॉर्न भाषा विशेषज्ञ से- न्यूयार्क गया था। जब तक पुलिस की का…

मिलिए भारत के पहले हॉर्न भाषा विशेषज्ञ से-

न्यूयार्क गया था। जब तक पुलिस की कार सायरन बजाते हुए दिख जाती थी। होटल के कमरे की खिड़की से देख रहा था कि कभी इस रास्ते से तो कभी उस रास्ते कोई पुलिस कार सायरन बजाते हुए चली आ रही है। लगता था कि पुलिस वाले दिन दोपहर सुबह शाम वीडियो गेम खेलने लगते हैं। पूरा शहर उस सायरन की आवाज़ के संदर्भ में वीडियो गेम लगता था। समझ नहीं आया कि पुलिस की कार इतना सायरन क्यों बजाती है। कई बार लगा कि सड़क के किनारे कार पार्क कर बैठे बैठे बोर हो जाते होंगे, इसलिए पुलिस वाले बीच सायरन सायरन खेलने लगते होंगे। पकड़म-पकड़ाई का खेल शुरू।

अक्सरहां सायरन की बारंबारता अर्थात फ्रीक्वेंसी तेज़ होती थी, हाउं हाउं, हाउं, हाउं जैसी ध्वनि पैदा की जाती थी मगर बीच में अचानक लंबी तान सुनाई देती थी। जैसे सियार ने हुंकार भरी हो। आरोह पर जाकर सायरन की आवाज़ ठहर जाती थी। अनूप जलोटा की तरह। जब तक ताली नहीं बजाएंगे तब तक हीरे-मोती के ई पर ही अटके रहते थे। ताली बजते ही जलोटा जी उतर आते थे। सायरनों के बीच पुलिस की जो मनोवृत्ति दिखती है उससे गुदगुदी होती है। यही बीमारी मेरे ग़ाज़ियाबाद आ गई है। पुलिस को नई जीप मिली हैं। उसके ऊपर फ्लैश ख़ूब है। थाने में सिपाही नहीं है मगर फ्लैश और सायरन से पुलिसिंग हो रही है। जनता को भी लगता है कि बड़ा काम हो रहा है।

पहले पुलिस वैन कहा गया फिर पीसीआर कहा गया अब पीआरवी पुलिस रिस्पांस व्हीकल कहा जाता है। नाम बदलते रहना चाहिए भले काम वही रहे। जब तब सायरन की आवाज़ आती रहती है। मुझे तो लगता है कि मेरी खिड़की पर ही पुलिस रहती है। कभी किसी को पुलिस के लिए रास्ता छोड़ते नहीं देखता, जैसे सबको पता है, इन्हें पहुंचना तो कहीं है नहीं, रास्ता देकर क्या होगा। पुलिस भी शायद इसी इत्मिनान से सायरन बजाती है कि देर हो जाए तो ही ठीक है। हथियारों से लैस अपराधी चले ही जाएं वरना कौन घड़ी-घड़ी ठांय-ठुई करेगा।

सोमवार रात देखा कि एक सुनसान सड़क पर सायरन बजने लगा। कई बार अकेले में जब डर लगता है तो लोग हनुमान चालीसा पढ़ने लगते हैं। वैसे ही कुछ लगा। हम भी ज़िम्मेदार हैं। पुलिस ड्यूटी पर रहती है तो नोटिस भी नहीं करते। हम मान कर चलते हैं कि पुलिस तो कहीं है नहीं। तो पुलिस भी क्या करे। जब तब सायरन बजाती रहे ताकि पता तो चले कि पुलिस है। हमारे
ग़ाज़ियाबाद में सायरन संगीत का नवोदय काल चल रहा है। उम्मीद है इसमें आगे चलकर निखार आएगा और संगीत कला के नए-नए रूप नज़र आएंगे।

भारत में हॉर्न भाषा की हमेशा उपेक्षा हुई है। यहां की सड़कों पर लोगों ने हॉर्न के अलग-अलग शब्द विकसित किए हैं। मैं ख़ुद को भारत का प्रथम हॉर्न भाषा विशेषज्ञ घोषित करता हूं। हॉर्न एक भाषा है। ग़ाज़ियाबाद के लोग हॉर्न ख़ूब बजाते हैं। यहां हर वक्त हॉर्न प्रतियोगिता चलती रहती है। सुबह-सुबह ख़ाली सड़क पर कुछ वाहन चालकों को कई मीटर तक हॉर्न बजाते सुना है, मानो एलान कर रहे हों कि हम आ रहे हैं, अभी कोई और न आए। तभी कोई ऑटो वाला झरझराते हुए गुज़र जाता है। ऑटो का शरीर ही अपने आप में हॉर्न है। जैसे नहाने के बाद कुत्ता बाल झाड़ता है वैसा ही ध्वनि बोध ऑटो की झरझराहट से होता है। ऑटो रिक्शॉ की कंपनी शैली अपने आप में एक हॉर्न है मगर ऐसा नहीं है कि ऑटो में हॉर्न नहीं होता है। ऑटो की झरझराहट के बीच उसका हॉर्न सुनकर ऐसे लगता है कि जैसे ऑटो से कोई स्कूटर निकल रहा हो।

कुछ हॉर्न की भाषा बेहद संक्षिप्त होती है। लगता है ट्रैफिक क्लियर करने के लिए नहीं बल्कि चेक करने के लिए बजाया गया है कि बज रहा है या नहीं। कई बार लोग बार-बार चेक करते हैं। एक बार तो बज गया, क्या दोबारा बजेगा, बस बजा दिया। हॉर्न की आवाज़ दूसरे हॉर्न की आवाज़ को चीरती है, फिर उस चीरे में कोई और हॉर्न की आवाज़ चीरा लगाती है। इसतरह से सरदर्द का जो सार्वजनिक माहौल बनता है। एक स्कूटर वाला इस तरह से हॉर्न बजाते जा रहा है जैसे उसका एक्सलेटर हॉर्न में ही लगा हुआ है। ट्रैफिक जाम में लोग अपना पांव एक्सलेटर से हटाकर हॉर्न पर रख देते हैं।

हॉर्न की भाषा के शोधार्थी सुन सकेंगे कि यहां की सड़कों पर हॉर्न सुनकर एकदम से सड़क के किनारे नहीं हो जाते। उन्हें याद आता है कि उनके आगे भी तो कोई कार चल रही है। पहले उसे हटाते हैं। बस पीछे वाला आगे के लिए हार्न बजा रहा है और उसके पीछ वाला उसके लिए। इस क्रम में हॉर्न चेन बनता है। कोई हटता नहीं है मगर हटाने के लिए सब हॉर्न बजाते हैं। स्कूल बसों के ब्रेक ने अपना अलग हॉर्न संस्कृति विकसित कर लिया है। स्टॉप पर इस तरह बसें ब्रेक लगाती हैं कि आप दूर खड़े होकर भी महसूस कर सकते हैं कि टायर के नीचे चले गए हैं और फिर नीचे-नीचे ग़ाज़ियाबाद से ही निकल लिए हैं।

कुछ हॉर्न मुझे मुक्ति बोध की लंबी कविताओं की मानिंद सुनाई देते हैं। कुछ हॉर्न को सुनकर लगता है कि कोई सड़क पर क्षणिकाएं लिख रहा है। हाइकू लिख रहा है। कुछ हॉर्न ऐसे होते हैं जैसे किसी ने नज़र बचाकर पच से थूक दिया हो। एकबार पीं बोलकर चुप हो जाते हैं। बहुत से हॉर्न में गुस्सा है तो मनुहार भी है। पां पां वाले हॉर्न तो मुझे वाह-वाह जैसे लगते हैं। कीं कीं वाले हॉर्न सुनकर लगता है कि बंदा पिनका हुआ है। मैं हॉर्न सुनकर बता सकता हूं कि कौन ओवरटेक करने के लिए बजा रहा है और कौन किनारे किनारे मस्ती में चलता हुआ बजा रहा है।

लाउडस्पीकर भारत के शहरों का स्थायी दर्द है। लगता है कि सभी धर्मों के ईश्वर ने आम भक्तों तक संदेश भिजवाया है कि मुझ तक पहुंचना है तो लाउडस्पीकर बजाओ। बस सब अपनी सुनाने लग जाते हैं। कई बार लाउडस्पीकर इस तरह से बजाए जाते हैं जैसे ईश्वर को चुनौती दी जा रही हो। पहले हमारी आवाज़ सुनो बलिहारी वरना हम पड़ोसी के कान का चदरा देइब फाड़ी। कई लाउडस्पीकर बोलते बोलते मिमियाने लगते हैं, फिर अचानक तेज़ हो जाते हैं। जैसे इन्हें पता है पड़ोसी जैसे ही झपकी लेगा, उसे ज़ोर से जगा देना है। न भगवान को सोने देना है न पड़ोसी को। आज कल त्योहार के मौके पर शोभा यात्रा निकलती है। यह यात्रा आपके मोहल्ले की सड़क पर लंबे वक्त तक ठहरी रहती है। भर भर रिक्शा लाद कर लाउडस्पीकर लिए चलते हैं। भक्तगण इस आवाज़ से अपने लिए एकांत का स्पेस क्रिएट करते होंगे।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड। यह पहला ऐसा बोर्ड है जो सूचना देने का काम करता है मगर नाम नियंत्रण का रखता है। इसी के अनुसार ग़ाज़ियाबाद की हवा देश में सबसे ज़हरीली है। अख़बारों ने ऐसे इतरा कर लिखा है कि अगले साल ज़हरीली की जगह छैल-छबीली लिख देंगे।

ज़हर अब जानलेवा नहीं रहा। ज़हर एक मिठास है। खांस है। फांस है। ये वो ज़हर नहीं कि पीते ही मार दिया। ये वो ज़हर हैं जो हमारे भीतर घर बसाते हैं। क्यूट प्वाइज़न। वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण का पर्यटन करना हो तो प्लीज़ ग़ाज़ियाबाद आएं। नाक और कान एक साथ फोड़वाएं। आंखों में जलन होगी, इसकी गारंटी है, भूपेंद्र का गाना सुनते हुए निकल जाएं कि इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है।

25 thoughts on “मिलिए भारत के पहले हॉर्न भाषा विशेषज्ञ से- न्यूयार्क गया था। जब तक पुलिस की का…”

  1. अब सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ सबसे दमदार आवाज के रुप मे आपका नाम लिया जाने लगा है ..
    अन्ना हजारे outdoor मोड से silent mode(batry low) मे पहुँच चुके हैं …
    आप अकेले नहीं ….. अगर आपका विरोध “भाजपा मात्र ” से नहीं बल्कि किसी भी गलत नीति से है तो जनसमर्थन आपके साथ है .

  2. Ravish ji…apne university Episode kiye…Ab Me aapko advise karta hu..ki..India ke Workers ke upar Episode kariye unki job difficulties family problem and how they Socially and Economically Exploit..how face health issue How they live. Without facility.then u can know the fact of India..specially unorganized sector me kam karne wale kamgar..daily wages..contractual and migrated.

  3. पीं पीं पीं, हट जाइए रवीश कुमार आ रहे हैं। भारत के पहले हारन (हॉर्न नहीं) भाषा एक्सपर्ट।

  4. वन्दे में दम है। जीते रहो मेरे भाई। कौन कितना वज़न रखता है उस के विरोधियों की संख्या बल से पता चलता है। रवीश भाई की खास बात जो मैंने गौर की वो यह है कि उन की जान के दुश्मन भी उन को फेस बुक पर फॉलो करते हैं। नहीं तो भला जो कोई एहमियत ही न रखता हो उस को कौन वक्त देगा। एक अच्छी खासी भीड़ को मेरे प्रिय भाई की वजह से गालियां निकालने का रोजगार मिला हुआ है। मेरी उमर भी आप को लग जाए मेरे भाई।

  5. Bahut hi mazedaar lekh. Shodh kaafi detailed hai… Sadak pe shor sehane ke dardnaak anubhav ko anandmayi banane ke bhi kaam aayega. Ek-aadh nahi, kayi jagahon pe khoob hansi aayi.

  6. देश में पत्रकारिता की विश्वसनीय, निष्पक्ष और निर्भीक आवाज सर्वजन और व्यवस्था को जोड़ने वाली पत्रकारिता के स्तम्भ मेरे पसंदीदा और देश के बेहतरीन पत्रकार रवीश कुमार को उनके जन्मदिन की हार्दिक सुभकामनाएँ और बधाई !

    #HBD_Ravish_sir

  7. हार्न तो बज चुका है सर! धर्म और जात के नाम पर बाँटने वालो का। टोपी दिखाकर वोट मांगने वालों का। कउन जात पूछने वालो का। लाऊड स्पीकर से इतनी ही परेशानी है तो कभी अजान पर पोस्ट लिखिये।
    ndtv को भी भ्रम है कि सब उसे देख रहे। पर गिरती trp सब बयान कर रही। गुजरात चुनाव परिणाम में भाजपा की जीत गूँज में आप भी कान बन्द करते और आँख मलते नजर आएंगे।

  8. कमाल का लिखते हैं सर👌
    वैसे आप की ओर से ऐसा कोई जवाब या पोस्ट नहीं देखा जिससे यक़ीन करूँ की आज आपका जन्मदिन है, फिर भी मैं ये लम्हा गँवाना नहीं चाहता, डरता हूँ कि अगर शक के दरमियान रहा तो ये मौका एक वर्ष के बाद आएगा। हम रहे न रहे! इसलिए आपको जन्मदिन के ढेरों शुभकामनायें, आप पहले से भी ज़्यादा ख़ुश रहें, ईश्वर की आप पर कृपा हो, हिम्मत और हौसले में इज़ाफा हो, आप सेहतमंद रहें…. आपको जनता से बेहद प्यार मिले…… और बहुत कुछ जो उल्लेखनीय नहीं है। 🎂🎈💖

  9. नमस्कार मित्रों
    काफी Time बाद आज फिर Election का मोका हे और कुछ रजनेतिक parties के पास धर्म और जाती के अलावा कोई और मुद्धा ही नहीं हे.
    पर हम आज सवाल करेंगे संसद और supreme court की कार्य व्यवस्था पर.
    धर्म और जाती की राजनीती 1000 वर्ष से भी ज्यादा पुरानी हे और ह्मारी गुलामी के कई कारण में से एक मुख्य कारण ये भी हे.
    पर 1950 में भारत को एक लोकतांत्रिक देश बनाने के बाद धर्म और जाती की दुकान बन्द करने के लिए ना तो संसद मे कोई कानून बना और ना ही supreme court ने कोई action लिया.

    क्योकि कोई चाहता ही नहीं हे की ये इस तरह की राजनीती बन्द हो.

    धर्म और जाती या अल्लाह और भगवान के नाम पर पार्टियों के नाम regiesterd होते रहे बे रोक टोक.
    नाम से ही पता चलता हे की ये party किसी विशेश समुदाय या मकसद के लिए बनाई गई हे.
    में विरोध करता हु इन जैसी धर्म के नाम पर, जाती के नाम पर, राज्य के विषेश अधिकार के नाम पर regiesterd होने वाली पार्टियों का और आप सब भी करते हे-पर कहता कोई नहीं.

    कहने से कुछ होगा भी नहीं क्योकि इस subject पर सही descion केवल देश की संसद या supreme court बेहतर ले सकती हे

    क्यों कानून नहीं आता की इस तरह की कोई भी पार्टी regiesterd नहीं होगी

    क्यों कानून नहीं आता कोई भी जाती के नाम पर आंदोलन तो करे पूरा अधिकार हे पर party बना कर चुनाव नहीं लड़ सकता

    क्यों कानून नहीं आता किसी भी धर्म के नाम पर election fight करना या धर्म को इस्तेमाल करना वर्जित हे और किया तो उस छेत्र मे वह party का election ही रदद हो जायेगा चाहे वह national party क्यों ना हो

    क्यों कानून नहीं आता की राज्य मुक्ती के लिए कोई party नहीं बनेगी और ना ही कोई party इसकी मांग कर सकती हे केवल आंदोलन हो सकता हे

    क्यों कानून नहीं आता की भगवान या अल्लाह के नाम पर या किसी भी धर्म के God के नाम पर कोई पार्टी या दल registered नहीं होंगे

    ये हमारे देश की अखण्डता का सवाल हे

    और यहां सवाल देश की संसद और खास तोर पर supreme court से हे की हमारे देश की राजनीती में अब नेहरू जी पटेल जी अटल जी जैसे पड़े लिखे नेता तो अब हे नहीं और जो हे वो पड़े लिखे हो तो भी ग्यानी नहीं हे पर supreme court judiciary तो पडी लिखी भी हे और ग्यानी भी हे फिर कुछ करती क्यों नहीं.

  10. मैंने न तो पत्रकारिता की पढ़ाई की है और न ही पत्रकारिता को इतने करीब से देखा है ,उसके बारे में जो कुछ भी जाना वो रविश से जाना ,ये वो दौर था जब tv को छोड़कर हमने यूट्यूब को चुना था ,रविश के साथ साथ और भी बहुत से लोग आते रहे जाते रहे ,मगर रविश ही थे जिन्होंने गिरफ्तार सा कर लिया ,उनका नियमित पाठक ,और नियमित श्रोता बन गया ,जिस फैन कल्चर का विरोध उन्होंने बार बार किया ,मैं उन्ही का फैन हो गया,आज जन्मदिन है उनका ,शुक्रिया रवीश ,जब लोगो से भरा शहर डराने लगता है तो तुम्हारे “कस्बे” में आ जाता हूँ और जब तुम्हारे कस्बे में खड़े गुंडों को गाली देता देखता हूँ तो डरकर फिर से बापस आ जाता हूँ किसी के “इश्क़ में शहर होने” के लिए …..
    रविश को इसलिए भी सुना और पढ़ा जाना चाहिए क्योंकि अब दूसरा रविश इस दुनिया और इस देश के नसीब में नहीं है !!
    #हैप्पी_बड्डे_रविश

  11. रवीश जी, इन दिनों केन्द्रीय सरकार ने अपने पीछे “हाँर्न प्लीज” की बजाय, “जगह मिलने पर साईड दिया जायेगा” लिखवा लिया है, ताकि विपक्ष के लोग हाँर्न मारना ही बंद कर दें. देश के राजनैतिक हाईवे पे इन दिनों कभी कभार अाप, स्वराज, हार्दिक, ठाकोर, मेवानी नाम के गिने चुने “विपक्षी हाँर्न” सुनाई दे जाते हैं. मीडिया नाम के “राजनैतिक हाईवे पेट्रोल” पर सायेरन बजाने की सरकारी पाबंदी लगा दी गयी है, फिर भी अाप बीच बीच में अपना हाँर्न बजा कर ट्रोलों से अपना चालान कटवा ही लेते हो.

  12. लेकिन इस पोस्ट में तो मोदी शाह का कहीं नाम ही नहीं है??? यह किस तरह की घटीया पत्रकारिता है?? मैं तो आपको महान पत्रकार समझता था।

  13. Great post. Not only ghaziabad here in Ahmedabad too it is the same story. Last week there was a wedding next door and the sound of their loudspeaker literally shook the windows of our house. This went on till 3am. Ravishkumar wish you a happy birthday and many many more to come.

  14. Happy birthday to the one and only journalist I admire the most.
    आपके जैसा बेखौफ और अच्छे orator को सुनना हम लोगो का सौभाग्य है। भगवान आपको दीर्घायु प्रदान करें । एक बार फिर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

  15. आज रवीश कुमार जी का जन्मदिन है
    ये हमारे समय की भोंपू पत्रकारिता के दौर में सबसे संवदेनशील निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकार हैं

    “हम फ़कीर नही है कि झोला लेकर चल देंगे
    हम लकीर है जहां खिंच जाते है और जहां खींच देते है वहां गहरे निशान पड़ जाते है~ रवीश कुमार

    Happy Birthday Ravish ji

  16. I enjoyed reading this writeup and the previous one on weddings as well….light and frothy, but so true. Ghaziabad is my city too and is rapidly becoming difficult to live in because of air and noise pollution. There is really nothing cute about this poison!

    You seem to be in a good mood today. Is it really your birthday, as some readers are commenting? I seem to remember a few readers wishing you the same, a couple of months ago…..so, the picture is a little unclear as one needs to take most things on SM with a pinch of salt. That being said, one can never have too many good wishes sent one’s way and always needs them in abundance, so even if it is not your special day…..
    I wish you a very long, happy, safe and healthy life ahead.

  17. #अंधश्रद्धाभक्ति_खतरा_ए_जान In Quran Sharif Surat Furqani no. 25 Aayat no. 52-59, by writing Kabiran, Khabira, Kabiru etc words, the glory of that one Kabir Allah has been stated that he is the only god who created nature within 6 days.

  18. मैंने न तो पत्रकारिता की पढ़ाई की है और न ही पत्रकारिता को इतने करीब से देखा है ,उसके बारे में जो कुछ भी जाना वो रविश से जाना ,ये वो दौर था जब tv को छोड़कर हमने यूट्यूब को चुना था ,रविश के साथ साथ और भी बहुत से लोग आते रहे जाते रहे ,मगर रविश ही थे जिन्होंने गिरफ्तार सा कर लिया ,उनका नियमित पाठक ,और नियमित श्रोता बन गया ,जिस फैन कल्चर का विरोध उन्होंने बार बार किया ,मैं उन्ही का फैन हो गया,आज जन्मदिन है उनका ,शुक्रिया रवीश ,जब लोगो से भरा शहर डराने लगता है तो तुम्हारे “कस्बे” में आ जाता हूँ और जब तुम्हारे कस्बे में खड़े गुंडों को गाली देता देखता हूँ तो डरकर फिर से बापस आ जाता हूँ किसी के “इश्क़ में शहर होने” के लिए …..
    रविश को इसलिए भी सुना और पढ़ा जाना चाहिए क्योंकि अब दूसरा रविश इस दुनिया और इस देश के नसीब में नहीं है !!
    #हैप्पी_बड्डे_रविश
    #hbd_ravish_kumar

  19. कभी मीडिया ने ये नहीं बताया कि सन्त रामपाल जी पिछले कई सालों अपने ऊपर लगे सभी आरोपों की cbi जांच की मांग रहे हैं लेकिन यदि किसी नेता को एक छींक भी आ जाये तो दिनभर उसी news का telecast होता रहता है।

  20. कभी मीडिया ने ये नहीं बताया कि सन्त रामपाल जी पिछले कई सालों अपने ऊपर लगे सभी आरोपों की cbi जांच की मांग रहे हैं लेकिन यदि किसी नेता को एक छींक भी आ जाये तो दिनभर उसी news का telecast होता रहता है।.

  21. मीडिया को चौथा स्तम्भ माना जाता है, लेकिन बहुत ऐसी मीडिया है कि कुछ पैसो के लिए अपना इमान बेच देते है,दलाली पे उत्तर जाता है, सच को तो दुनिया के नजरो से दूर रखता है, और झूठ,फरेब को जनता तक पहुचने का काम किया है,Ravish Kumar ji आप से हमे बहुत उमीद है,आप मरते दम तक सचाई को जनता के सामने लाते रहेंगें

  22. कभी मीडिया ने ये नहीं बताया कि सन्त रामपाल जी पिछले कई सालों अपने ऊपर लगे सभी आरोपों की cbi जांच की मांग रहे हैं लेकिन यदि किसी नेता को एक छींक भी आ जाये तो दिनभर उसी news का telecast होता रहता है।

  23. Ravish Kumar Ji Sant Rampalji Maharaj aur unake lkho anuyayee ke sath huye anyaya aur atyachar ki sachchai janane ke liye dekhe barbala ghatana ki sachchai aur sachchai janakar unke khilaf huwe shadyantra ki CBI janch ki awaj ko bulandi se uthaye. Is punya kam me sahyog dekar apni patrakarita aur jeevan ko safal banaye . ye hum sant Rampalji Maharaj ke 90 lakh anuyayiyo ki apse kar baddh prarthna hai

  24. हाॅर्न धीरे बजाओ,
    मेरा देश सो रहा है।
    मजबूरन लिखना पड़ा..
    कि
    अँग्रेजों के जुल्म सितम से,
    फूट फूटकर रोया है।

    धीरे हाॅर्न बजा रे पगले,
    देश हमारा सोया है।।
    आजादी संग चैन मिला है,
    पूरी नींद से सोने दे।
    जगह मिले वहाँ साइड ले ले
    हो दुर्घटना, होने दे।।
    किसे बचाने की चिंता में,
    क्यों तू इतना खोया है,
    ट्राफिक के सब नियम पड़े हैं,
    कब से बंद किताबों में।
    जिम्मेदार सुरक्षा वाले,
    सारे लगे हिसाबों में।
    तू भी पकड़ा, सौ की पत्ती,
    क्यों ईमान में खोया है?
    मेरा देश है सिंह सरीखा,
    सोये तब तक सोने दे,
    राजनीति की इन सड़कों पर,
    नित दुर्घटना होने दे।
    देश जगाने की हठ में तू,
    क्यूँ हाॅर्न बजाकर रोया है,
    अगर देश यह जाग गया तो,
    जग सीधा हो जाएगा।

    पाक-चीन चुप हो जाएँगे,
    और अमरीका रोएगा।।
    राजनीति से शर्मसार हो,
    गुलशन जन-मन रोया है।
    धीरे हाॅर्न बजा रे पगले,
    देश हमारा सोया है….
    देश हमारा सोया है……।

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