जब किसी अस्पताल में मरीज के मर जाने पर भी चार दिनों तक वेंटिलेटर लगाकर अस्पताल ल…

जब किसी अस्पताल में मरीज के मर जाने पर भी चार दिनों तक वेंटिलेटर लगाकर अस्पताल लाखों रुपए वसूल लेता है तब
किसी डॉक्टर का कोई कसूर नहीं होता
कसूर होता है अस्पताल का
जिसमें कारपोरेट प्रबंधन होता है
और बैंकों से उधार ली गई वित्तीय पूंजी लगी होती है वित्तीय पूंजी का यही स्वभाव है
वह अपने लिए इंसानों का खून मांगती है
खून पीती है और दिन-रात बढ़ती है
सारा कसूर इसी वित्तीय पूंजी का है
यह वित्तीय पूंजी वही है
जो हम जैसे छोटे छोटे लोगों ने
अपने मासिक तनख्वाह
हाड़तोड़ मेहनत में से
पेट काटकर बचाए
और बुरे वक्त के लिए बैंकों में जमा कराए
बैंकों ने कंपनियों को
उद्योगों और अस्पतालों को ऋण दिया
और वही ऋणीअब हमारे लिए
बुरा वक्त पैदा कर रहे हैं
इन बैंकों पर सरकारों का नियन्त्रण है
सरकारों पर पूंजीपतियों का
इसलिए किसी डॉक्टर का कसूर नहीं है
अब आप जानते हैं कसूर किसका है।

~दिनेशराय द्विवेदी