पूरी दिल्ली में इस तरह से लोगों की पुरानी कारें, स्कूटर और बाइक खड़ी रहती है। लो…

पूरी दिल्ली में इस तरह से लोगों की पुरानी कारें, स्कूटर और बाइक खड़ी रहती है। लोग तरह तरह के टोटकों के कारण इन्हें कबाड़ में नहीं फेंकते। सोसायटी के बेसमेंट से लेकर मोहल्ले के पेवमेंट तक। क़ानूनी अड़चन हो सकती है। अगर ऐसा है तो सरकार कोई नीति बनाकर दिवाली से पहले वाहन कचरे को उठाकर फिकवा दे ताकि कुछ तो जगह निकले। फालतू के मोह से कुछ नहीं होगा।

21 thoughts on “पूरी दिल्ली में इस तरह से लोगों की पुरानी कारें, स्कूटर और बाइक खड़ी रहती है। लो…”

  1. रविश जी !! ठीक इसी तरह हर क्षेत्र में भरे कचरे को भी उठाकर बाहर फेंकना चाहिए ! चाहे वह राजनीति मे हो, घर मे हो, या पत्रकारिता में !! कुछ अनुचित तो नही कहा न सर ?

  2. Astha ka desh hai ye vikas ka nahi…mandir or masjid or kabergaha he bani Hindu muslmano ne koi school hospital to nahi banya Haan sarkar ne naam ka desikaran zarroor kar diya..rashtrwavidion ko yaad rakhna chahiye just sansad see hamara desh chalta hai wo bhi angrz de gye hain

  3. रवीश कुमार जी दिल्ली सरकार के साथ केजरीवाल का नाम ले लेते तो आप क्या क्या घट जाता ?
    पर मुझे पता है ये ये आप से नही हो पायेगा इसी लिये आप ट्रोल किये जाते है क्योंकि आप पात्र है !!

  4. Sir bhandara khate hue aapne bhi kya soch lagai waha…ab koi ni bolega ki aap modi ji k swach bharat ki soch ko badhawa de rahe hain, ek nazar un bhakton ko dhundhne main bi daliye

  5. Ye Junkyards me bech dete log to paise bhi mil jaye kilo ke bhaav se. Metal, rubber, glass etc recycle bhi ho jata. Thoda paryavaran ka nuksan bhi kam ho jata aur jagah bhi ban jati.

  6. बीजेपी आईटी सेल का दृश्य :
    बॉस : आलोक , जय प्रकाश और अनूप , जल्दी से इधर आओ I
    तीनों आईटी सेल कर्मचारी भागे भागे बॉस के सामने उपस्थित होते है I
    बॉस : लड़कों ! स्थिति गंभीर है और इस मुद्दे को टॉप प्रायोरिटी देनी है I कुछ भी करके यशवंत सिन्हा की इमेज ऐसी बना दो की उसके द्वारा दिए गए बयान को हमारे भक्त सीरियसली ना लें I अपने सुझाव दो ताकि मैं एक ब्लू print तैयार कर सकूँ I
    जय प्रकाश : सर , मेरे हिसाब से यशवंत सिन्हा के कैरिएर को एक फेलियर के तोर पर सब से पहले दिखाना चाहिए I
    आलोक : सर, मुझे तो लगता है की यशवंत सिन्हा के तार कांग्रेस के साथ जोड़ देते हैं , कांग्रेस से अंधभक्त वैसे ही नफरत करते हैं , तो होगा ये की हमें ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी I
    अनूप : सर, यशवंत सिन्हा एक आईएएस ऑफिसर रह चुके हैं तो कैरियर तो फ़ैल बताना कोई अच्छा आईडिया नहीं लगता , कांग्रेस के साथ जोड़ कर भी हम ज्यादा नुकसान नहीं कर सकेंगे , क्योंकि वो हमारे पुराने नेता रहे हैं I मेरे हिसाब से तो हमें वही पुराना मुसलमान वाला फार्मूला लगा देना चाहिए I यशवंत सिन्हा के पुरखों को मुसलमान बता देते हैं , दो चार नाम बदल कर जैसे यासीन खान और मुबारक अली दादा परदादा बता देते हैं , कोई नकली सी किताब का नाम लिख देते हैं एतिहासिक साक्ष्य के नाम पर , सोने पर सुहागा हो जायेगा I पहले भी तो हम नेहरु को मुसलमान बता ही चुके हैं और वो पोस्ट्स काफी हिट भी हुई हैं I
    बॉस : अनूप मुझे तुम्हारा आईडिया एक दम सही लगा , इस पर कार्य जल्द से जल्द प्रारंभ कर दो , और हाँ पोस्ट्स के बाद ” सच्चे हिन्दू और जय श्री राम का नारा जरुर लगाना

    Copied
    😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂

  7. सत साहेब, रवीश जी हार मत मानना भारत के सभी ईमानदार आपके साथ हैं।
    यह एक विडम्बना हैं कि सच का साथ देने वालों की संख्या हमेशा कम रही हैं।

  8. बीएचयू की घटना का आँखोंदेखा हाल वहा की छात्रा Smriti की जुबानी.
    पढ़िये और कोई सुझाव हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर दीजिये.

    काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक आन्दोलन

    21 तारिख शाम 6 बजे:
    मोटरसाईकिल सवार दो बदमाशों ने बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (बीएफए) द्वितीय की छात्रा के साथ उस वक्त छेड़छाड किया जब वह क्लास करके त्रिवेणी काम्लेक्स स्थित अपने हास्टल जा रही थी.
    घटना के बाद उसने प्रोक्टोरियल बोर्ड के सिक्योरिटी पर्सनल से इस बारे मे शिकायत की और हास्टल के वार्डेन से भी तो उन्होने उसे ही डाँट कर भगा दिया. उल्टा उस लड़की से ही सवाल दाग दिया “तुम शाम ढलने तक क्यो बाहर थी?” इसके बाद छात्रा ने इसकी शिकायत प्रोक्टोरियल बोर्ड मे की.प्रोक्टोरियल बोर्ड से कुछ आला अधिकारी आये ओर घटना की जानकारी ली और छात्राओं से उनकी मांग लिखित में ली.
    22 तारिख सुबह 6 बजे:
    त्रिवेणी की छात्राऐं एकत्र होकर लंका गेट की ओर आंदोलन के लिये निकली. लडकीयाँ दो दिन तक लगातार आंदोलन करती रही. इन दो दिनो में बहुत सारे लोगो के बहुत से पक्ष है. जैसे कुछ अराजक तत्व थे,महामना के मूर्ति पर कालिख पोतने का प्रयास किया गया और भी न जाने तमाम तरह की बाते. मैं इस आन्दोलन में सक्रिय रुप से थी ओर इसकी गवाह हूँ।
    सबसे पहले कहा गया कि बाहर के लोग आन्दोलन में आये थे. तो इसके लिए मेरा कहना है कि हम सुबह 6 बजे आंदोलन के लिये बैठे थे तो यह खबर फैलने में ही 11-12 बजे होंगे. फिर कैसे सम्भव है कि दिल्ली या हैदराबाद (जैसा आरोप लग रहे) से कोई इतनी जल्दी बनारस आ जाये?
    फिर महामना के मूर्ति पर कालिख पोतने वाली बात पर कहना चाहूंगी कि हमारे सामने ये सब नही हुआ और महामना तक कोई पहुँचे तो हम छात्रो से पहले लंका के लोग उनकी खबर ले लेते. इसलिए यह बात सरासर गलत है।
    इसके अलावा #Unsafe_BHU के पोस्टर की बात. यह पोस्टर भी किसी बाहरी ने नही ब्लकि विज़ुवल आर्टस् की छात्राओ द्वारा ही बनाया गया और अपने ही छात्रो द्वारा टांगा गया।
    ये भी शाम की घटना है पर कुछ लोगों के अनुसार आंदोलन के एक दो घण्टे के अंदर #Unsafe_BHU का पोस्टर लग चुका था.
    पहली रात तो छात्राओ ने सड़क पर बिताकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करती रही मगर दूसरी रात यह आंदोलन हिंसा भेंट चढ़ गया. इस आन्दोलन को नेतृत्व कर रही एकता जी ने कहा कि 22 की रात को वीसी सर ने बोला कि सारी लडकियाँ एक जगह इक्ट्ठी हो जाओ जहाँ लडके न हो मैं बात करुँगा. उसके बाद सर नही आये,शाम को उनका फरमान जारी हुआ की वो एमएमवी आ रहे है लेकिन उनकी शर्त यह है कि सर के बात करने तक एमएमवी का गेट बंद रहेगा. कोई मीडिया नही रहेगी और छात्राओं के फोन जमा करा लिये जाऐंगे. छात्राओं ने इसका विरोध किया उन्होने कहा कि ठीक है लडके वहाँ नही होंगे पर गेट खुला होगा.मीडीया भी रहेगी ओर छात्राऐं रिकॉर्डिंग भी करेंगी. इस पर बहुत लोगो का कहना था कि लडकियों को सिर्फ मीडिया फूटेज चाहिये.उनको समस्या का समाधान नही चाहिये.
    पर मैं यह बता देना चाहती हूँ कि 2015 में महिला महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा हु़ये आंदोलन में वीसी सर पहुँचे थे और विवादित बयान दिया जैसे सोशल साइंस में क्या पढ़ना होता है मुझे पता है. यदि एक घर में भाई ओर बहन की पढाई की बात हो तो बहनों को चाहिये की भाई को आगे बढ़ाये. वीसी सर ने इस तरह के न जाने कितने अनर्गल बयान दिए.
    हम दो घण्टे तक एमएमवी में इन्तजार करते रहे सर नही आये हम वापस लंका पहुँच गये।
    शाम तक सर का फरमान आया कि वो त्रिवेणी आ रहे है.
    हालांकि मुझे पता था कि वो नही आऐंगे लेकिन फिर भी हम सब एकता जी के कहने पर हास्टल में रुके और ढेर सारी लडकियों को भी रुकने को कहा. यह वीसी सर का लडकियों को बरगलाने का अच्छा तरीका था. जैसे ही लड़कियां हास्टल में आयी, बड़े प्रेम से हास्टल गेट बंद कर दिया गया.
    आधे बच्चे हास्टल गेट से बाहर निकल चुके थे.
    11 बजे आवास पर आन्दोलन करती छात्राओं पर पहले प्रोक्टोरियल बोर्ड के सदस्य द्वारा लाठी भांजी गयी और कहा गया कि कुछ अराजक तत्वो ने पेट्रोल बम फेंका तो बचाव में लाठी चलानी पड़ी लेकिन मैं स्पष्ट कर दूँ कि वे बीएचयू के ही छात्र थे जो प्रशासन की सह पर अवैध रुप से छात्रावासो में रह रहे है। कुछ लोगो का कहना था कि हम बीएचयू को जेएनयू नहीं बनने देंगे.ऐसा कहने वालों का आरोप है कि छात्राओं ने जान-बूझकर आंदोलन के लिए इसी समय को चुना है ताकि वो चर्चा में आ सकें,लेकिन ऐसा नही है ये घटना ही ऐसे वक्त पर घटित हुई है।
    खैर..!! ऐसा कहा जा रहा कि बीएचयू में शुरू से ही एक ख़ास विचारधारा का बोलबाला रहा है. लड़कियां यहां बाहर से पढ़ने भले ही आती हों लेकिन उन्हें लेकर यहां की सोच में कोई फ़र्क नहीं है. लड़कियों का खुलापन और आज़ादी कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता. चाहे वो सहपाठी हो ,प्राध्यापक हों, कर्मचारी हों या फिर ख़ुद महिला छात्रावासों की वॉर्डन ही क्यों न हो.
    पिछले दिनों जिस तरह से विश्वविद्यालय परिसर में विवाद बढ़े हैं उसे लेकर भी बीएचयू में हलचल है और शायद जेएनयू न बनने देने वाली बात इन्हीं सबकी उपज है. जेएनयू वामपंथी विचारधारा के गढ़ के अलावा स्वच्छंद माहौल और विचारों के लिए भी जाना जाता है. शायद बीएचयू में वो स्वच्छंदता लोगों को न पसंद आ रही हो.
    बस बात इतनी सी थी कि छात्राएं कुछ मांग कर रही थी.
    उनकी मांग यही थी कि उन्हे कैंपस में सीसीटीवी कैमरा चाहिये, स्ट्रीट लाईट की व्यवस्था, समय सीमा पर प्रतीबंध खत्म किया जाये, दोषीयों को सजा दी जाये.
    आंदोलन कर रही छात्राओं की एक मांग यह भी थी कि कुलपति ख़ुद वहां आकर उनसे बात करें. और यही वो ‘पेंच’ है जो आंदोलन को इतना लंबा खींच रहा था. कुलपति वहां आने को तैयार नहीं थे और छात्राएं उनके दफ़्तर में जाने को तैयार नहीं थी. इसमें कई छात्राऐं एक साथ बोल पडी़ “कुलपति की गरिमा है तो हमारी भी गरिमा है. हम कुलपति के दफ़्तर में भी जा सकते हैं लेकिन सिर्फ़ दो -चार नहीं बल्कि सभी छात्राएं जाएंगी और मीडिया को भी वहां जाने की अनुमति देनी होगी.”

  9. Sir Mppsc Mains pariksha me hui gadbadi ko aapke sangyan lana chahugi.. Result ke akhiri page par 24 me se 17 ek hi samuday ke hain.
    Achha jilo ke hote huye bhi unhone Agar Malwa ko centre chuna, sable roll no sath hain or to or controller of exam bhi us hi samuday se aate hain, isse chhatro me bhram ki sthiti haijo rosh me badalti ja rahi hai, meri aapse vinti hai ki iski nishpaksh jaanch ho or doshiyo ko saja ho, Mp me aur rajyo ki bhanti jativad na hone de

  10. Rabbis jaisey patalkaar avein he muh se kudaa failatey rehtey hain in jaison ko sarkar samundar mein fenk de to samaaj ka bhi kuch bhala ho.. Logo sahi jankari miley or #presstitute se mukti miley…. 🙂

  11. Dear Ravish, Why So Scared?
    Keshav Bhardwaj 12 hours ago Opinions & Views, WR Specials Leave a comment

    Dear Ravish,

    Why so scared? It was just a WhatsApp message, that too in a group. You think that someone who would kill you, send threats on WhatsApp? You’ve been in journalism for a long time now, so you’d probably be used to threats. Or is it first time in your 27 year old career that you’re getting threats?

    As far as I remember, you left social media in August 2015, accusing it. Now for some strange reason, you’re back and you’re back in form. While going through your posts, I observed that half of the times you talk about your critics & haters only. You for some reasons, share the screenshots of comments & message received as the young netizens were sharing Sarahah feedback screenshots few days back. Grow up & move on.

    One media website is profoundly supporting you & you also in return are supporting them back. I saw a post in which you shared the mobile number of the person who sent that message in WhatsApp group & ‘investigators’ of that media website digged out almost person detail of that person & released it publicly. Wasn’t it wrong? If you & your haters would start behaving in the same manner, what would be difference? Why should you appear on national television each night.

    You wrote letters to the PM, asking wether his followers would kill you. What do you want PM Modi to do? Should he release press note that none of my followers would kill the brave journalist Ravish? We know this seems impossible, but God knows if you desire this only.

    That media website investigated everything out of that person but probably forgot to inform you on how to block someone & mute a group on WhatsApp. Since you said that you were being added back again & again despite leaving the group many times, here is the link which might help on how to block someone. Thank me later.

    I agree with you & that website on the concern of fake news, but just speaking won’t help.

    Do you need security? If you geniuenly feel the need, you should write an application to your nearest police station & to the police commisnor. Or are you seeking sympathy & attention? Prior to this, PR stunts were limited to politicians & Bollywood celebrities, but you seem to be breaking that myth.

    I know ratings of the channel are not good. Viewership is declining, so you should focus on content & other things. I don’t think PR stunts like these are working or would work.

    Ravish, you’re experimenting something new, a new tool, a new stunt for viewership, but let me tell you; when this all would finish, people would laugh at your stunts.

    You present yourself as the ‘torch-bearer’ of ptrakarita (Journalism in Hindi) but you get scared of a WhatsApp message & write to the PM for that. I know, you’re aware with the fact that in your profession, threats are normal & common and most of the times, threats are vague. Many journalists have sacrificed their lives for their cause, & you claim to be on a great cause. I’m not asking you to sacrifice anything but at least be brave. Don’t behave like a high school student, even high school students don’t take WhatsApp messages seriously these days. You already have grey hair, now try to be mature.

    Everyone knows that your drama is a publicity stunt. I don’t know if this is your idea or someone else suggested you, but this is a flop idea. Try something new.

    Don’t get offensive on me, as you usually are with your haters & critics. After all humara-aapka khet ka jhagra thore-hi hai.

    Aapka,
    Keshav Bhardwaj

    The last line translates to English as “After all we don’t have a land dispute.”

  12. Kuch logo ne pehli car ki nishani rakhi hai or kuch ne baap dada ki inko kon samjhae ki baap dada ko aise nahi rakha jata bhai unke room me saja lo bhai ijjat se rakho puraane scootar hai vo car parking ki jagah rokne ke kaam aate hai modi ji ko puraane note najar aa gae ye kab najar aayege bhai inko bhi kisi bank me jama karva le

  13. I am partiality BJP supporter .. But Ravish ji … You say absolutely true… ! Ye Emotional garbage hai .. jo road gali mai problem kerta hai .. same problems in mind set also.. BJP ho ya congress supporter…

  14. Aisehi hamare yahape 1 police station ke samne salo se padi hui hai police k w jeep,,,salo se ye jeep pade rehneke baad ab ye bilkul mitti se milne kinkagar par hai,,,ye jeep to janta ke paise se kharida hua hai,,to phir ise kachre me fekwakar janta ke paise ka nuksan kyu kia jata hai?our phir aise car yaa jeep ko use nehi karne se loha vest bhi to hota hai,,,agar ise koi bhi kabad khana me bhi ise dedijaye to shayad iska kuch tarah se istemar hosakta hai,,,ismese polution bhi kam hoga….

  15. Moh parking ki jagah ka hai sir purane 4th hand scooter and car log kharidte hai idhar sirf parking gherne ke liye..log is parking ke liye jaan tak lene ko tayaar rehte hai aapki pyaari dilli me…parking ka mamla ho to dilliwale bata dete hai samne wale ko…. ki dilli kitni dil walo ki hai…aap bhi try karke dekho sir

  16. Yes sir you are right,kahe iske picha BJP ka hath to nhi,Kyo ki wahe asa km krwa skti Hai ,
    kagriwal ka nam Lena ka apke bas ka nhi,
    Oh kahe modi ne in sab ko paisa to nhi Diya gardi road
    pe kharda krne ko,
    Ya modi ne kajriwal ko paise dediya ho ki won’t logo ko road pe gardi Kara krne se roke… 😜

  17. Ravish style…subah subah uthe …sair pe gae…ghar ae to dekha missed call tha…missed call kiska..cong##ss ke papp# ka…mujhe kaha ki news chalao…news me modi k piche pado…kaho ki congr# k tym khushali thi…ab behali hai…hame kaha ki paisa milega …humne kaha hum ravish hai ..paise se nahi sirf chaat k khush rehte hai…

  18. रविश जी फिर से नमस्कार ।
    भगत सिंह ने कहा था कि गूंगी बहरी सरकार को सुनाने के लिए ये धमाके किये गए हैं । खैर जो भी हो
    लोग कहते हैं आप निष्पक्ष पत्रकार हैं । आप पढ़े लिखे हैं । अगर आइंस्टीन के सापेक्षता के नियम से देखा जाय तो आप किसी न किसी के सापेक्ष निष्पक्ष होंगे ? चाहे वो रोहित सरदाना हो या बरखा दत्त ।
    रविश जी प्रत्येक व्यक्ति एक विचारधारा से ग्रसित होता है चाहे वो विचारधारा गांधीवादी हो या मार्क्सवादी या दक्षिणपंथी ही हो । बिना विचारधारा के आदमी शून्य होता है फिर उसके अपने बुने तानों बानो से एक विचारधारा बनती है (मैं मानता हूं गांधी और नेहरू के साथ यही हुआ है) । मनुष्य व्यवहार अति और शून्य की होती है या तो वो अति चाहता है या शून्य । बीच मे उसे संतुष्टि नही मिलती है । विचारधारा के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है ।
    आप कहते हैं कुछ मीडिया घराने हिन्दू मुस्लिम में लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं तब मैं आपको एक न्यूज वेबसाइट the wire की एक न्यूज याद दिलाना चाहूंगा जिसका शीर्षक था ” भारतीय मीडिया में दलित पत्रकार क्यों नहीं हैं? ” ( http://thewirehindi.com/12056/indian-media-newsroom-dalit-journalist-reporters/) क्या इसको हिन्दू समुदाय को बांटने की कोशिश में न देखा जाय ? आप के लेख कभी कभार इसपर आते हैं और आप इसकी खबरों को शेयर भी करते रहते हैं ( मृणाल पांडे वाले मामले में आपने एक खबर शेयर की थी ) ।
    रविश जी विकास सतत प्रक्रिया होती है लेकिन बदलाव त्वरित प्रक्रिया जो सब नही सह सकते हैं ( जैसा नोटबन्दी के मामले में हुआ ) ।
    रविश जी सूर्य धीरे धीरे प्रकाशित होता है जिसे हम विकास का नाम दे सकते हैं ये सबको अच्छा लगता है । अगर यही सूर्य अचानक से प्रकट हो जाये तो सब नही सह पाएंगे ऐसा बदलाव के मायने में होता है ।
    किसी ने कहा है “विकास नेता करते हैं और बदलाव तानाशाह लाते हैं ” । ये आप पर निर्भर करता है आप क्या चाहते हैं ।
    आज एक ट्रक पर लिखी हुई चंद लाइन याद आ गयी हैं
    ” दम है तो पास कर वरना बरदाश्त कर “

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