नोटबंदी फेल हो गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कह दिया कि …

नोटबंदी फेल हो गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कह दिया कि 99 प्रतिशत पांच सौ और हज़ार के नोट वापस आ गए हैं। नोटबंदी के समय 15 लाख 44 हज़ार करोड़ के पांच सौ और हज़ार के नोट चलन में थे। 15 लाख 28 हज़ार करोड़ रुपया वापस आ गया है। इसका मतलब है कि जो दावा किया जा रहा था कि जिनका काला धन होगा, वो बर्बाद हो जाएग, वो फ़र्ज़ी निकला। कहा जा रहा था कि जिनके घरों में नोट छिपा कर रखे गए हैं वो डर से बैंक नहीं आएंगे और नष्ट हो जाएंगे। ऐसे लोग रात को नींद की गोली खा कर सो रहे हैं। जो नोट गंगा जी में फेंका गया, समंदर में फेंका गया, वो कौन सा पैसा था? मगर अब तो सारा पैसा वापस आ गया है। सरकार कह रही है कि ऐसा दावा नहीं किया गया था कि जितना पैसा नहीं आएगा वो रिज़र्व बैंक के लिए मुनाफ़ा होगा और बैंक उतना पैसा सरकार को वापस कर देगा। यही तो दावा हो रहा था। ऐसा कहां हुआ? करीब आठ हज़ार करोड़ रुपया तो नए नोट छापने में लग गया। कई लोगों ने लाइन में लगकर तकलीफें झेलीं, जान चली गई लोगों की। CMIE के अनुसार नोटबंदी के पहले चार महीनों में पंद्रह लाख नौकरियाँ भी गईं । काम धंधे बंद हो गए। भारतीय रिज़र्व बैंक को अपनी रिपोर्ट में कहना चाहिए था कि नोटबंदी सफल हुई या नहीं क्योंकि फैसले लेने के बाद सरकार ने बोला था कि रिज़र्व बैंक की सिफारिश पर ही नोटबंदी की गई थी। चिदंबरम ने कहा है कि नोटबंदी के बहाने काले धन को सफेद करवा दिया गया। सरकार कहती है कि करीब पौने दो लाख से तीन लाख करोड़ अघोषित आय की जानकारी हुई है। एक तो रिजर्व बैंक अभी तक नोट ही गिन रहा था, उससे पहलों ही सरकार ने अघोषित आय पकड़ कर दिन भी लिया ? आप बताइये कि इतने पैसे पकड़ने के लिए आपने कितने लोगों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए हैं? आयकर का मुक़दमा चलता है। कहीं दायर किया है? कौआ पकड़ रहे हैं या अघोषित आय? हावर्ड और हाड वर्क वालों में बहस होगी, फर्ज़ी दावे फिर से होंगे और भारत की चुनावी राजनीति में घूस और दलाली का पैसा फिर से पानी की तरह बहेगा। उस पैसे से मंच सजेगा, उस पर नेता हेलिकाप्टर से उतरेगा, पैसे देकर बसों में भर कर लोग लाए जाएंगे और मंच से नेता का दावा होगा कि काला धन मिट गया है। हमारे नेता ईमानदार हैं। वो काला धन सामने रखकर उसी से मंच सजाकर बोलते हैं कि देखो मिट गया है। जनता भी ईमानदार है। कहती हैं, सही है हुज़ूर मिट गया है। जब हमीं मिट गए तो काला धन क्यों नहीं मिटेगा हुज़ूर। मूल सवाल है कि इस ख़बर को चैनलों से ग़ायब करने के लिए कौन सा ईंवेंट या प्रोपेगैंडा आने वाला है?

21 thoughts on “नोटबंदी फेल हो गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कह दिया कि …”

  1. नोट बन्दी अच्छा steap था gov.ka जो नकिली नोट बारबाद हुआ ओर इस तरह के काम मे लिप्त लोगो का धांधा बंद हुआ।

  2. सर अभी भी झोल है.. नोटबंदी मे कतारो के दबाव मे बैंककर्मियो नकली नोट चेक नही कर पाये. और बड़ी संख्या मे फेक करेंसी भी जमा हूई है.

  3. रविश जी, सीधे-सादे तरीके से अर्थ लगावें तो कह सकते हैं कि “नोटबन्दी” फेल हो गई। परन्तु, मेरा मानना है कि बीजेपी के “नोटबन्दी” का फैसला कोई राष्ट्रहित के उद्देश्य से लिया गया फैसला नहीं था। उसका एकमात्र मकसद तत्कालीन विधानसभा चुनावों को जीतने का था, जिसमें वो सफल भी रहा! सर्वविदित है कि चुनाव बिना कालेधन के नहीं हो सकता। बीजेपी ने उस समय अपनी व्यवस्था कर ली थी और विपक्षियों पर नोटबन्दी का प्रहार किया, जिससे सारे विपक्ष धराशायी हो गया। उदाहरण के रूप में मैं बिहार विधानसभा चुनाव की बात करता हूं, जिसमें एनडीए की तरफ से 26 हेलीकॉप्टर और 5 या 6 हवाईजहाज इस्तेमाल किये जा रहे थे। इतने हवाईजहाज और हेलीकॉप्टर की व्यवस्था सफेदधन से तो नहीं की जा सकती!!

  4. सर, आपका नजरिया कुछ भी हो सकता है लेकिन एक बात जो नोट बदीं से हुयी वह यह है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के दायरे में बढोतरी हुई है । ज्यादा लोग कर देने लगेगे । दूसरी बात एक गहरा सदेंस जनता में गया है की कर(tax) देना पडता है ऐसे ही नहीं चलता है।

  5. Ravish g kewal 55k vivers bache h all india m aapke beacuse of your fake news…….मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा कि नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई से वर्ष 2016-17 में नोटों की छपाई की लागत दोगुनी होकर 7,965 करोड़ रुपये हो गयी जो 2015-16 में 3,421 करोड़ रुपये थी. इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2016-17 में 7.62 लाख नकली नोटों का पता चला, जबकि 2015-16 में 6.32 लाख नकली नोट पकड़े गये. एक अन्य जानकारी में आरबीआई ने कहा कि नोटबंदी के बाद पुराने 1,000 रुपये के कुल 632.6 करोड़ नोटों में से 8.9 करोड़ नोट अब तक नहीं लौटे हैं.

  6. Ab Finance Minister ghum raha hai gol gol. nahi de paya note bande ka sahi karan. Bola maine nahi kaha Black money aaege wapas. Humne sare paise bapas lene mai success hasil ke ha ha ha. Abe fir note chape kio ya utne he bapas mang leta jitne nahi rakhne the. Stupid decision. Shame on Modi uneducated person

  7. फेल हो गया! पहले से पता था,, लेकिन, डर जरुर बैठा है विश्वास ना हो तो रियल स्टेट की हालत देख लीजिये, लखनऊ में फाइनेंसरों की कमी नहीं थी, जमीन के रेत आसमान छू रहे थे, रातों रात गायब हो गये, बढ़िया है राबिस जी, मुद्दे जरूर उठने चाहिए , पूरा समर्थन है, लेकिन अगर इससे इतर एखलाख उठता है तो केरल और मालदा भी उठना चाहिए,..अब आपके चमचे मुझे भक्त की उपाधि देने शुरू हो जाएंगे, हो सकता है गरियाएं भी

  8. तुम्हारे अनुसार हो जाने दो नोटबन्दी फैल , तुम जैसे बिकाऊ पत्रकारों की औकात क्या मोदी जी के सामने , एकबार को हो सकता है नीति गलत हो या सही , लेकिन मोदी जी की नीयत गलत नहीं है रे बलात्कारी दल्ले के भाई , और हाँ , नोटबन्दी फेल नहीं हुई , समझे

  9. अघोषित आय का आँकड़ा आयकर विभाग के जमा हुए रिटर्न से मिला या मिलता है, इतना तक तुम्हें इल्म (इल्म का प्रयोग जानबूझकर) या आभास नहीं चचा, धन्य है भारत भूमि कि तुम्हें राष्ट्रीय एँकर का दर्जा प्राप्त है।

  10. Ravish kumar ji, नोटबन्दी एक क्रांतिकारी कदम था, जो अपने घोषित उद्देश्यों में पूरी तरह असफल रहा। हालांकि इसको फेल करने में मदद करने वालों और इसपे मज़े लेने वालों और इसपे खुश होने वालों के रूप में हरामियों की शिनाख्त हो गयी।

  11. Ravish Kumar aap ko to news sahi se dekhana bhi nahi ata. Aapki nahi lekin apke teacher ki thodi iajjat rakho. Jisne apko journalism ki degree di.
    Baat karta hai note bandhi fail hui

  12. Sir ..We proud of you
    .
    Ki koi toh hai jo sarkar ki darbari n kr ke reality pe focus krta h….
    Aur aap kyu unlogo ko jawab dete hai jinaka the wrong nunber lg kya hai….

  13. चलो मान लेते है कि कोई फायदा नही हुआ डोकलाम ,सर्जिकल स्ट्राइक ,कश्मीर आतंकवाद ,ट्रिपल तलाक मैं आप कुछ कहेंगे। मान लेते है कि हर फैसला आपको पसंद नही आया हो क्योंकि कुछ कमियां तो हम मैं ही है कि हम सब कुछ एक ही इंसान से चाहते है और वो कुछ करना चाहे तो उस पर सवाल उठाते है। पत्रकारिता मैं प्रश्नचिन्ह लगाना आवश्यक है किन्तु देश के लिये हित अहित की सोच भी आवश्यक है। कुछ लोगो की स्वार्थी सोच बहुमत समर्थन की सकारात्मक सोच पर कोई प्रभाव नही है।

  14. एक एंकर प्राइम टाइम में कहता है ये सरकार कुछ नहीं कर रही .. अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोटा जा रहा है । सरकार भृष्ट है । नोटबन्दी विफल है । खूब काला धन सफेद हुआ ।

    पर वो एंकर स्वयं के संस्थान के घोटाले पर चुप है । उस एंकर के यहाँ के पत्रकार सरकार में मंत्री सेट करते हैं । फिर नकाब ओढ़ के कहते हैं । हम तो सरकार के खिलाफ लिख रहे हैं ।

    देखो हम पारदर्शिता लाये हैं । देखो हम ईमानदार पत्रकारिता वाले हैं । हमारा सर्टिफिकेट तुमसे ज्यादा सफेद है ।

    सही कहते हैं हजूर । सफेद सर्टिफिकेट तो होगा ही । पर हजूर पत्रकारिता की आत्मा मर गई है । और दुःख की बात ये है कि हुजूर आपने तेरहवीं में भी घोटाला कर लिया है ।

  15. Aapko to iss sarkar ka har kaam fail hi Nazar aata hai
    Kabhi so called secular logo ( lalu Parivar , Congress party )par bhi bola kare janaab
    Maana ki aapko modi ke PM ban ne ka Dard hai
    Par Baar Baar yu Dard dikhaane se kya hoga

  16. नोटबन्दी सिर्फ कागज मे फेल हूई है सर आप उसके बाद के असर को देखिये
    dollar 63 rs पर आ गया
    rbi ने ब्याज दर घटाई
    banks ने सस्ते loan देने शुरू किये
    property सस्ती हूई
    ये micro-mini micro economics है
    आपको नहीं समझ आयगी
    आप कुछ समझेंगे और कुछ और समझायेंगे
    आप रहने दिजिये

  17. नोटबंदी से जमा हुए अरबो रूपये से बैंक लोन में भारी गिरावट आनी चाहिए थी जो की नहीं हुआ उल्टा और जनता पे फालतू के चार्ज ठोंक दिए गए , इसका साफ़ मतलब है की वो अरबो रूपये बड़े व्यपारियों के व्यपार में सर्कुलेट हो रहे हैं और पब्लिक का ध्यान भटकने के लिए jio का ड्रामा रचा गया , इसका जवाब हॉवर्ड का पढ़ा अर्थशास्त्री नहीं दे सकता सिर्फ कोई अरुण जेटली का गुरु ही दे पायेगा

  18. भाई जी मेरा मानना है कि नोटबंदी सफल हुई है क्योंकि पिछले दस साल में कांग्रेस के हाथ में रहे प्रिंटिग प्रेसों में हर सिक्वल व नंबर के दो नोटों को छापा गया है जिससे करीब छह लाख करोड़ की डूप्लीकेट मनी मार्केट में पिछले रास्ते से उतार दी गयी जिसमें सारे नोट तो असली हैं किन्तु एक ही नम्बर के दो नोट छापे गये हैं R. B. I. नोटों के नंबर की पड़ताल कर चुकी होगी किंतु सच जानते हुये भी मोदी सरकार इसे स्वीकार नही सकती क्योंकि सार्वजनिक रूप से एेसा करने पर अंतरराष्ट्रिय स्तर पर हमारी मुद्रा का ह्वास हो जायेगा जिसके कारण डालर का मूल्य रुपए की तुलना में 100 के आसपास पंहुच सकता है जो जी डी पी के विनाश का कारण हो सकता था

  19. Ravish G aap Anchor ache h par galat jagah pahunch gaye h Notbandi ki wajah se Taxpayer badhe h terretist Bank lutne ko majboor h ab desh mein itne gaddar peda kar diye h congress ne kuch samay aur dijiye in sabka sahi ilaj jarur karenge

  20. लोगों की इतनी घटिया सोच और बेवकूफी भरे बेहूदे Comments पढ़ कर लगता है कि fb acount ही deactivate कर दूँ अरे भाई कुछ पढ़े लिखे हो तो तर्क करो अपनी असलियत क्यों बताने लगते हो और हिंदुत्व तीन साल से ही ख़तरे में आ गया उससे पहले सब ठीक था तो भाई मोदी जी को हटाओ क्योंकि सारी परेशानी तीन साल से ही है।अगर कोई जवाब देना चाहे तो तहज़ीब के दायरे में देना !

  21. Sir aap jisko samjhana chah rahe ho unka kuchh ho hi nahi sakta. Sab lag log jat dharm bhasha k hisab se bat ya baat diye gaiye Hai … Sari baate yaise hi Hai jaise bhais k age bin bajaye bhais rahi paguraye😊 but aap try karte rahte Hai so big thanks to yiu.

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